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ग्रह अस्त - वैदिक ज्योतिष में ग्रह अस्त

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ग्रह अस्त – वैदिक ज्योतिष में ग्रह अस्त

वैदिक ज्योतिष में ग्रह अस्त या अस्त तब होता है जब कोई ग्रह राशि चक्र में सूर्य के अत्यंत निकट आ जाता है। सूर्य की तीव्र ऊर्जा और प्रकाश के कारण वह ग्रह अपनी शक्ति खो देता है और “अस्त” हो जाता है। इस स्थिति में ग्रह अपनी पूर्ण सकारात्मक शक्ति नहीं दे पाता।

अस्त ग्रह की आंतरिक शक्ति, आत्मविश्वास, अभिव्यक्ति और बाहरी परिणामों को प्रभावित करता है। इसका प्रभाव ग्रह, भाव स्थिति, राशि बल और संपूर्ण जन्म कुंडली पर निर्भर करता है।

ग्रह अस्त होने पर क्या होता है?

जब कोई ग्रह सूर्य से निश्चित डिग्री के भीतर आता है, तो वह कमजोर या ढका हुआ माना जाता है। उदाहरण के लिए, अस्त बुध संचार को प्रभावित कर सकता है, अस्त शुक्र संबंधों को प्रभावित कर सकता है, और अस्त गुरु ज्ञान या मार्गदर्शन को प्रभावित कर सकता है।

कौन से ग्रह अस्त हो सकते हैं?

राहु और केतु को छोड़कर सभी ग्रह अस्त हो सकते हैं। बुध और शुक्र अक्सर अस्त होते हैं क्योंकि वे सूर्य के निकट रहते हैं।

क्या अस्त हमेशा नकारात्मक परिणाम देता है?

हमेशा नहीं। यदि अस्त ग्रह अपनी राशि, शुभ भाव या दृष्टि से मजबूत हो, तो वह अच्छे परिणाम भी दे सकता है। कई बार अस्त ग्रह की ऊर्जा को आंतरिक बना देता है।

अस्त की गणना कैसे की जाती है?

अस्त सूर्य और अन्य ग्रह के बीच डिग्री अंतर मापकर निर्धारित किया जाता है। प्रत्येक ग्रह के लिए अलग-अलग अस्त सीमा होती है।

ग्रह अस्त जीवन को कैसे प्रभावित करता है?

इसका प्रभाव इस पर निर्भर करता है कि कौन सा ग्रह अस्त है और वह किस भाव में स्थित है। यह करियर, संबंध, धन, स्वास्थ्य या आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता है। सही प्रभाव जानने के लिए पूर्ण कुंडली विश्लेषण आवश्यक है।

क्या अस्त बुध खराब होता है?

अस्त बुध संचार और निर्णय क्षमता को प्रभावित कर सकता है, लेकिन यदि वह अपनी या उच्च राशि में हो, तो प्रभाव संतुलित हो सकता है।

क्या अस्त शुक्र विवाह को प्रभावित कर सकता है?

हाँ, अस्त शुक्र प्रेम, संबंध और सुख-सुविधाओं को प्रभावित कर सकता है, लेकिन परिणाम पूरी कुंडली पर निर्भर करते हैं।

क्या अस्त गुरु हानिकारक है?

अस्त गुरु बाहरी मार्गदर्शन या आत्मविश्वास को कम कर सकता है, लेकिन यदि शुभ स्थान में हो, तो आंतरिक ज्ञान प्रदान कर सकता है।

क्या उपाय अस्त के प्रभाव को कम कर सकते हैं?

हाँ, मंत्र जप, दान, रुद्राक्ष या रत्न कमजोर अस्त ग्रह को मजबूत करने में सहायक हो सकते हैं।