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बुध अस्त – वैदिक ज्योतिष में बुध दहन की पूरी जानकारी

वैदिक ज्योतिष में बुध अस्त तब होता है जब बुध सूर्य के अत्यंत निकट आ जाता है और उसकी तेजस्विता के कारण अपनी शक्ति खो देता है। बुध सूर्य के निकट रहने वाला ग्रह है, इसलिए इसका दहन अक्सर होता है।

बुध बुद्धि, संचार, व्यापार, तर्क और निर्णय क्षमता का कारक है। बुध अस्त होने पर विचार और संचार में कमजोरी आ सकती है।

बुध अस्त का जन्म कुंडली में प्रभाव

दहनग्रस्त बुध संचार, शिक्षा और व्यावसायिक निर्णयों को प्रभावित कर सकता है। इसका प्रभाव भाव स्थिति और दृष्टि पर निर्भर करता है।

बुध कब दहनग्रस्त माना जाता है?

बुध सामान्यतः सूर्य से लगभग १४ अंश के भीतर आने पर दहनग्रस्त माना जाता है।

क्या बुध अस्त हमेशा नकारात्मक होता है?

नहीं। अपनी राशि या शुभ स्थिति में बुध सकारात्मक परिणाम दे सकता है।

बुध अस्त जीवन को कैसे प्रभावित करता है?

करियर में गलतफहमी, अध्ययन में एकाग्रता की कमी और संचार में बाधा आ सकती है।

क्या बुध अस्त व्यापार के लिए हानिकारक है?

संचार संबंधी भ्रम हो सकता है, लेकिन अंतिम परिणाम पूरी कुंडली पर निर्भर करता है।

क्या बुध अस्त वाणी को प्रभावित करता है?

हाँ, हिचकिचाहट या गलत संचार हो सकता है।

क्या उपाय से बुध मजबूत हो सकता है?

बुध मंत्र, भगवान विष्णु की पूजा और उपयुक्त होने पर पन्ना धारण करना लाभकारी है।

बुध कितने समय तक अस्त रहता है?

सूर्य के निकट रहने की गोचर अवधि में बुध अस्त रहता है।