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आज का गौरी पंचांग - रविवार, १९ जुलाई २०२६

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रविवार, १९ जुलाई २०२६ के लिए आज का गौरी पंचांग - नल्ला नेरम का समय

गौरी पंचांगम दिन और रात को समान समय खंडों में विभाजित करता है, जिनमें से प्रत्येक का अपना एक शुभ या अशुभ स्वभाव होता है। पाँच शुभ समय - अमृत (Amridha), लाभम (Labam), धनम (Dhanam), सुगम (Sugam) और उथि (Uthi) - तमिल में नल्ला नेरम कहलाते हैं। इन समय खंडों में महत्वपूर्ण कार्य करना तथा रोगम (Rogam), विषम (Visham) और सोरम (Soram) से बचना, तमिल और दक्षिण भारतीय परिवारों द्वारा सदियों से अपनाई जाने वाली परंपरा है।

दिन गौरी पंचांग

कालसमयप्रकृति
उथि०६:०८ AM – ०७:४७ AM✅ सामान्य शुभ
अमृत०७:४७ AM – ०९:२७ AM✅ सर्वश्रेष्ठ
रोगम्०९:२७ AM – ११:०६ AM🔴 अशुभ
लाभम्११:०६ AM – १२:४६ PM✅ शुभ
धनम्१२:४६ PM – ०२:२५ PM✅ शुभ
सुगम्०२:२५ PM – ०४:०४ PM✅ शुभ
सोरम्०४:०४ PM – ०५:४४ PM🔴 अशुभ
विषम्०५:४४ PM – ०७:२३ PM🔴 अशुभ

रात गौरी पंचांग

कालसमयप्रकृति
धनम्०७:२३ PM – ०८:४४ PM✅ शुभ
सुगम्०८:४४ PM – १०:०५ PM✅ शुभ
सोरम्१०:०५ PM – ११:२५ PM🔴 अशुभ
विषम्११:२५ PM – १२:४६ AM🔴 अशुभ
उथि१२:४६ AM – ०२:०६ AM✅ सामान्य शुभ
अमृत०२:०६ AM – ०३:२७ AM✅ सर्वश्रेष्ठ
रोगम्०३:२७ AM – ०४:४७ AM🔴 अशुभ
लाभम्०४:४७ AM – ०६:०८ AM✅ शुभ

ऊपर दी गई तालिका आज के दिन और रात के गौरी पंचांगम के समय दिखाती है, जिनकी गणना द्रिक गणित पद्धति द्वारा स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर की गई है।

गौरी पंचांगम क्या है?

गौरी पंचांगम (கௌரி பஞ்சாங்கம்) दक्षिण भारत की एक पारंपरिक समय-निर्धारण प्रणाली है, जो प्रत्येक दिन नए कार्यों की शुरुआत के लिए सबसे शुभ और कम शुभ समय खंडों की पहचान करती है। दिन - सूर्योदय से सूर्यास्त तक - और रात - सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक - दोनों को लगभग समान अवधि वाले भागों में विभाजित किया जाता है। प्रत्येक भाग की अवधि प्रतिदिन बदलती रहती है क्योंकि ऋतुओं और स्थान के अनुसार सूर्योदय तथा सूर्यास्त का समय बदलता है।

यह प्रणाली तमिल सौर पंचांग और पाम्बु पंचांगम पर आधारित है, जो तमिलनाडु में व्यापक रूप से अनुसरण किया जाने वाला पारंपरिक तमिल पंचांग है। सामान्य पंचांग के विपरीत, गौरी पंचांगम केवल दिन के भीतर के समय पर केंद्रित है - जिससे किसी भी समारोह, यात्रा या नए कार्य से पहले दक्षिण भारतीय परिवारों द्वारा पूछे जाने वाले इस प्रश्न का त्वरित और विश्वसनीय उत्तर मिलता है: आज सही समय कौन-सा है?

त्वरित जानकारी: गौरी पंचांगम को Gowri Panjangam भी लिखा जाता है। दोनों नाम एक ही प्रणाली को दर्शाते हैं। तमिल नाम கௌரி பஞ்சாங்கம் (Kauṟi Pañcāṅkam) इसका पारंपरिक तमिल लिप्यंतरण है।

नल्ला नेरम क्या है?

नल्ला नेरम (நல்ல நேரம்) का अर्थ है "अच्छा समय"। इसमें नेरम (நேரம்) का अर्थ समय और नल्ला (நல்ல) का अर्थ अच्छा या शुभ होता है। गौरी पंचांगम में नल्ला नेरम विशेष रूप से उन पाँच शुभ समय खंडों को कहा जाता है, जिनमें किसी भी महत्वपूर्ण कार्य की शुरुआत करना शुभ माना जाता है: अमृत (Amridha), लाभम (Labam), धनम (Dhanam), सुगम (Sugam) और उथि (Uthi)।

गौरी नल्ला नेरम (கௌரி நல்ல நேரம்) वह नल्ला नेरम है जो विशेष रूप से गौरी पंचांगम की तालिका से प्राप्त होता है और अन्य पंचांग आधारित शुभ समयों से अलग है। दक्षिण भारत में लोग किसी महत्वपूर्ण कार्य से पहले सामान्यतः दो बातें अवश्य जांचते हैं: पहला, क्या आप गौरी पंचांगम के अनुसार नल्ला नेरम में हैं, और दूसरा, क्या उस दिन के दैनिक पंचांग के अनुसार राहु कालम या यमगंडम नहीं चल रहा है।

गौरी पंचांगम के सभी समय खंड - अर्थ और उपयोग

गौरी पंचांगम के प्रत्येक समय खंड का एक तमिल या संस्कृत नाम होता है, जो उसकी प्रकृति को दर्शाता है। पाँच शुभ और तीन अशुभ समय खंड सप्ताह के दिनों के अनुसार एक निश्चित क्रम में घूमते रहते हैं। प्रत्येक दिन पहला समय खंड बदलता है और इस प्रकार सभी समय खंड क्रमशः सप्ताह भर में चक्र पूरा करते हैं।

समय खंड तमिल / अर्थ प्रकार सबसे उपयुक्त कार्य
अमृत (Amridha) அமிர்தம் - अमृत / अमरत्व सबसे शुभ विवाह, नामकरण संस्कार, धार्मिक समारोह और किसी भी नए कार्य की शुरुआत
लाभम (Labam) லாபம் - लाभ / मुनाफा शुभ व्यापारिक सौदे, निवेश, अनुबंध पर हस्ताक्षर और वित्तीय निर्णय
धनम (Dhanam) தனம் - धन / समृद्धि शुभ संपत्ति खरीदना, बैंकिंग कार्य और धन-संपत्ति बढ़ाने से जुड़े कार्य
सुगम (Sugam) சுகம் - आराम / सुख शुभ यात्रा, स्वास्थ्य संबंधी कार्य और आरामदायक गतिविधियाँ
उथि (Uthi) உதி - उन्नति / प्रगति हल्का शुभ दैनिक कार्य, सामान्य नई शुरुआत और अध्ययन
रोगम (Rogam) ரோகம் - रोग / बीमारी अशुभ बचें: चिकित्सीय प्रक्रियाएँ, महत्वपूर्ण शारीरिक कार्य और नए कार्यों की शुरुआत
विषम (Visham) விஷம் - विष / बाधा अशुभ बचें: महत्वपूर्ण निर्णय, बड़ी खरीदारी और महत्वपूर्ण उद्देश्य से यात्रा
सोरम (Soram) சோரம் - हानि / दुर्भाग्य अशुभ बचें: निवेश, नई प्रतिबद्धताएँ और ऐसे कार्य जिनका दीर्घकालिक प्रभाव हो
महत्वपूर्ण सूचना: इन समय खंडों का क्रम सप्ताह के दिन के अनुसार बदलता है। उदाहरण के लिए, मंगलवार को दिन का गौरी पंचांग रोगम से शुरू होता है। यह क्रम पाम्बु पंचांगम में निश्चित है - सप्ताह का वही दिन हमेशा उसी समय खंड से शुरू होगा। वर्ष भर केवल वास्तविक घड़ी के समय बदलते हैं क्योंकि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय बदलते रहते हैं।

दैनिक योजना के लिए गौरी पंचांगम का उपयोग कैसे करें?

तालिका को समझ लेने के बाद गौरी पंचांगम का उपयोग करने में एक मिनट से भी कम समय लगता है। नीचे दी गई चरणों वाली व्यावहारिक विधि अपनाएँ:

  1. आज का सक्रिय समय खंड खोजें। ऊपर दी गई तालिका में आज की तिथि देखें। वर्तमान समय वाली पंक्ति बताएगी कि इस समय कौन-सा गौरी समय खंड चल रहा है।
  2. जाँचें कि क्या यह नल्ला नेरम है। यदि वर्तमान समय खंड अमृत, लाभम, धनम, सुगम या उथि है, तो यह शुभ समय है और आप अपना कार्य शुरू कर सकते हैं।
  3. राहु कालम की भी जाँच करें। नल्ला नेरम होने पर भी राहु कालम और यमगंडम के दौरान महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचें। इस तालिका के साथ आज का राहु कालम भी अवश्य देखें।
  4. शाम और रात्रि के कार्यों के लिए रात्रि गौरी पंचांग का उपयोग करें। रात्रि की तालिका सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक का समय दर्शाती है। रात्रि के समय आपके स्थान के वास्तविक सूर्यास्त के आधार पर गणना किए जाते हैं - किसी निश्चित समय के आधार पर नहीं। यदि कोई समय खंड आधी रात के बाद तक चलता है, तो वह समय अगली कैलेंडर तिथि पर लागू होता है।
  5. साप्ताहिक दृश्य का उपयोग करके पहले से योजना बनाएँ। ऊपर दी गई तालिका पूरे दिनों को एक साथ दिखाती है। विवाह, यात्रा की बुकिंग या महत्वपूर्ण व्यापारिक निर्णयों के लिए आने वाले अमृत समय खंडों की पहले से पहचान कर लें।
त्वरित सुझाव: जीवन के महत्वपूर्ण निर्णयों - जैसे विवाह मुहूर्त, संपत्ति खरीद या नामकरण संस्कार - के लिए सर्वोत्तम नल्ला नेरम के साथ एक औपचारिक शुभ मुहूर्त का भी मेल होना चाहिए। तिथि निश्चित करने से पहले दोनों के अनुकूल होने की पुष्टि करने के लिए मुहूर्त कैलकुलेटर का उपयोग करें।

गौरी पंचांगम और चौघड़िया - आपको किसका उपयोग करना चाहिए?

गौरी पंचांगम और चौघड़िया दोनों ही दैनिक शुभ समय की पहचान करते हैं, लेकिन दोनों अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं से आए हैं और उनकी गणना की विधियाँ भी अलग हैं। इनमें से कोई भी सार्वभौमिक रूप से अधिक सटीक नहीं माना जाता - दोनों अलग-अलग सांस्कृतिक और खगोलीय परंपराओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और अलग-अलग समुदायों की आवश्यकताओं के अनुसार उपयुक्त हैं।

पहलू गौरी पंचांगम चौघड़िया
मुख्य क्षेत्र दक्षिण भारत - तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल उत्तर भारत, गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान
भाषाई मूल तमिल / दक्षिण भारतीय परंपरा संस्कृत - चौघड़िया = "चार घटी"
प्रति दिन विभाजन दिन के समान समय खंड + रात के समान समय खंड दिन के समय खंड + रात के समय खंड (घटी आधारित)
गणना का आधार सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को समान भागों में विभाजित किया जाता है दिन की अवधि को ग्रह स्वामी के अनुसार घटिकाओं में विभाजित किया जाता है
शुभ समय अमृत (Amridha), लाभम (Labam), धनम (Dhanam), सुगम (Sugam), उथि (Uthi) ( में से ) अमृत, लाभ, शुभ, चर (दिन के अनुसार बदलता है)
प्रमुख स्रोत पाम्बु पंचांगम (पारंपरिक तमिल पंचांग) वैदिक मुहूर्त ग्रंथ और क्षेत्रीय पंचांग
सबसे उपयुक्त दक्षिण भारतीय परंपराएँ; तमिल मुहूर्त संबंधी निर्णय उत्तर भारतीय समारोह; वैदिक घंटे-आधारित शुभ समय

यदि आप दक्षिण भारतीय या तमिल परंपराओं का पालन करते हैं, तो गौरी पंचांगम स्थापित और पारंपरिक विकल्प है। उत्तर भारतीय पंचांग संबंधी निर्णयों या घटी-आधारित मुहूर्त गणनाओं के लिए चौघड़िया अधिक उपयुक्त है। जीवन के महत्वपूर्ण कार्यों के लिए दोनों का एक साथ उपयोग किया जा सकता है - ये एक-दूसरे के पूरक हैं, प्रतिस्पर्धी नहीं।

शुभ पंचांग गौरी पंचांग की गणना कैसे करता है?

शुभ पंचांग, गौरी पंचांगम की गणना द्रिक गणित पद्धति का उपयोग करके करता है। यह प्रेक्षण आधारित खगोल विज्ञान की पद्धति है, जो पारंपरिक सूत्र-आधारित तालिकाओं के बजाय सूर्य की वास्तविक और मापी गई स्थिति का उपयोग करती है। इससे प्राप्त समय आपके सटीक स्थान के सूर्योदय और सूर्यास्त पर आधारित होता है, न कि किसी सामान्य क्षेत्रीय अनुमान पर।

प्रत्येक दिन के गौरी पंचांग के समय खंड वास्तविक दिन की अवधि के समान भाग होते हैं, अर्थात सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को बराबर भागों में विभाजित किया जाता है। इसी प्रकार रात के समय खंड वास्तविक रात्रि - सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक - को समान भागों में विभाजित करके निर्धारित किए जाते हैं। चूँकि दिन और रात की अवधि वर्ष भर बदलती रहती है, इसलिए गर्मियों की रातों में समय खंड छोटे तथा सर्दियों की रातों में लंबे होते हैं। शुभ पंचांग आपके शहर का पता लगाता है और उसी स्थान के प्रमाणित सूर्योदय एवं सूर्यास्त के आँकड़ों के आधार पर सभी समय सीमाओं की गणना करता है।

सप्ताह के प्रत्येक दिन दिन की तालिका किस समय खंड से प्रारंभ होगी, इसका क्रम पाम्बु पंचांगम में निश्चित रूप से निर्धारित किया गया है। यह तमिलनाडु में प्रतिवर्ष प्रकाशित होने वाला प्रमाणिक तमिल पंचांग है। इसी पारंपरिक क्रम और आधुनिक प्रेक्षण आधारित गणना के संयोजन से स्थान के अनुसार सटीक नल्ला नेरम का समय प्राप्त होता है।

रात्रि गौरी पंचांग संबंधी सूचना: यदि कोई रात्रि समय खंड आधी रात के बाद तक चलता है, तो दिखाया गया समय अगले कैलेंडर दिन पर लागू होता है, न कि उस दिन पर जिस दिन सूर्यास्त हुआ था। उदाहरण के लिए, यदि कोई समय खंड ११:१५ PM से १२:५५ AM तक चलता है, तो वह १२:५५ AM वाली तिथि का भाग माना जाएगा।

दक्षिण और उत्तर भारतीय दोनों परंपराओं के शुभ समयों को पूरी तरह समझने के लिए, अपने गौरी पंचांग के साथ चौघड़िया और होरा की भी तुलना करें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

आज गौरी पंचांग में सबसे शुभ समय कौन-सा है?

क्या विवाह मुहूर्त के लिए गौरी पंचांग का उपयोग किया जा सकता है?

गौरी पंचांग और नल्ला नेरम में क्या अंतर है?

रात्रि गौरी पंचांग की गणना कैसे की जाती है?

गौरी पंचांग का क्रम सप्ताह के प्रत्येक दिन क्यों बदलता है?