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मार्च २०२६ का पंचांग

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लहर का आकार

सूर्योदय और सूर्यास्त

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राशि

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तिथि

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नक्षत्र

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योग

दैनिक पंचांग विवरण

ब्रह्म मुहूर्त:
राहु काल:
यमगण्ड काल:
प्रातः सन्ध्या:
करण:
दूसरा करण:
पक्ष:
अमान्त माह:
पूर्णिमांत माह:
शक संवत:
विक्रम संवत:
अभिजीत मुहूर्त:

इस महीने आने वाले त्यौहार और छुट्टियाँ

मार्च २०२६ का हिंदू पंचांग कैलेंडर वैदिक ज्योतिष पर आधारित एक संपूर्ण मासिक पंचांग है, जिसमें प्रत्येक दिन की तिथि, नक्षत्र, योग, करण, राहु काल, शुभ मुहूर्त तथा सूर्योदय और सूर्यास्त की सटीक जानकारी दी गई है। यह पंचांग चंद्रमा और ग्रहों की गति के अनुसार स्थान आधारित (City-wise) गणना पर आधारित है।

यह पृष्ठ चयनित महीने के लिए मासिक हिंदू पंचांग कैलेंडर प्रदर्शित करता है। कैलेंडर में दी गई किसी भी तारीख पर क्लिक करके उस दिन का विस्तृत दैनिक पंचांग देखा जा सकता है।

मार्च २०२६ का दैनिक पंचांग

मार्च २०२६ के प्रत्येक दिन के लिए उपलब्ध दैनिक पंचांग में निम्नलिखित जानकारियाँ शामिल होती हैं:

  • दिन की संपूर्ण तिथि और नक्षत्र विवरण
  • राहु काल, यमगण्ड काल और गुलिक काल
  • अभिजीत मुहूर्त और ब्रह्म मुहूर्त
  • राशि परिवर्तन और चंद्र स्थिति
  • उस दिन के त्योहार और व्रत

मार्च २०२६ के प्रमुख त्योहार और व्रत

मार्च २०२६ में कई महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार और व्रत आते हैं, जिनमें Holi, Dhuleti, Fuldolotsav, Papmochani Ekadashi, World Water Day, Ram Navami और Kamda Ekadashi जैसे पर्व शामिल हैं।

सभी त्योहारों की पूरी सूची देखने के लिए त्योहार और छुट्टियां पृष्ठ देखें।

पंचांग कैसे पढ़ें? (तिथि, नक्षत्र, योग और करण)

पंचांग शब्द का अर्थ है "पाँच अंग", जो समय की आध्यात्मिक संरचना को दर्शाते हैं। ये पाँच अंग प्रत्येक दिन की ऊर्जा और शुभता को परिभाषित करते हैं।

तिथि

तिथि चंद्रमा के चरण को दर्शाती है और व्रत, पूजा तथा धार्मिक अनुष्ठानों की योजना बनाने में महत्वपूर्ण होती है। उदाहरण के लिए, एकादशी उपवास और आध्यात्मिक शुद्धि के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है।

नक्षत्र

नक्षत्र उस तारा समूह को दर्शाता है जिसमें चंद्रमा स्थित होता है। 27 नक्षत्र मानव भावनाओं, प्रकृति और कार्यों के परिणाम को प्रभावित करते हैं।

योग

योग सूर्य और चंद्रमा के संयोग से बनता है और दिन की शुभता या अशुभता को दर्शाता है। कुछ योग नए कार्य प्रारंभ करने के लिए विशेष रूप से शुभ माने जाते हैं।

करण

करण तिथि का आधा भाग होता है और धार्मिक अनुष्ठानों के समय निर्धारण में सहायक होता है।

वार

प्रत्येक वार एक ग्रह द्वारा शासित होता है और दिन की ऊर्जा को प्रभावित करता है।

स्थान आधारित सटीक पंचांग

हिंदू पंचांग की गणना भौगोलिक स्थिति पर निर्भर करती है। शुभ पंचांग आपके चयनित शहर के अनुसार सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रह स्थिति के आधार पर सटीक पंचांग प्रदान करता है।