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शनि अस्त (Shani Ast) – वैदिक ज्योतिष में शनि दहन की पूरी जानकारी

वैदिक ज्योतिष में शनि अस्त तब होता है जब शनि सूर्य के अत्यंत निकट आ जाता है और उसकी तेजस्विता के कारण अपनी शक्ति खो देता है। इस स्थिति को अस्त या मौढ्य कहा जाता है।

शनि अनुशासन, कर्म, जिम्मेदारी, परिश्रम और दीर्घकालिक सफलता का कारक है। शनि अस्त होने पर करियर और स्थिरता में विलंब हो सकता है।

शनि अस्त का जन्म कुंडली में प्रभाव

दहनग्रस्त शनि करियर, स्थिरता और जिम्मेदारियों को प्रभावित कर सकता है। इसका प्रभाव भाव स्थिति और दृष्टि पर निर्भर करता है।

शनि कब दहनग्रस्त माना जाता है?

शनि सामान्यतः सूर्य से लगभग 15 अंश के भीतर आने पर दहनग्रस्त माना जाता है।

क्या शनि अस्त हमेशा नकारात्मक होता है?

नहीं। यदि शनि अपनी राशि या उच्च राशि में हो तो सकारात्मक परिणाम दे सकता है।

शनि अस्त जीवन को कैसे प्रभावित करता है?

करियर में देरी, पहचान में कमी और जिम्मेदारियों में वृद्धि हो सकती है।

क्या शनि अस्त करियर के लिए हानिकारक है?

देरी संभव है, लेकिन अंतिम परिणाम पूरी कुंडली पर निर्भर करता है।

क्या शनि अस्त तनाव बढ़ाता है?

हाँ, आंतरिक दबाव बढ़ सकता है।

क्या उपाय से शनि मजबूत हो सकता है?

शनि मंत्र, दान और उपयुक्त होने पर नीलम धारण करना लाभकारी है।

शनि कितने समय तक अस्त रहता है?

सूर्य के निकट रहने की गोचर अवधि में शनि अस्त रहता है।