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शुक्र अस्त – वैदिक ज्योतिष में शुक्र दहन की पूरी जानकारी

वैदिक ज्योतिष में शुक्र अस्त तब होता है जब शुक्र सूर्य के अत्यंत निकट आ जाता है और उसकी तेजस्विता के कारण अपनी शक्ति खो देता है। शुक्र सूर्य के निकट रहने वाला ग्रह है, इसलिए इसका दहन अक्सर होता है।

शुक्र प्रेम, विवाह, विलासिता, सुख-सुविधा, कला और रचनात्मकता का कारक है। शुक्र अस्त होने पर प्रेम और सुख की बाहरी अभिव्यक्ति कम हो सकती है।

शुक्र अस्त का जन्म कुंडली में प्रभाव

दहनग्रस्त शुक्र विवाह, संबंध, आर्थिक सुख और कला क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। इसका प्रभाव भाव स्थिति और दृष्टि पर निर्भर करता है।

शुक्र कब दहनग्रस्त माना जाता है?

शुक्र सामान्यतः सूर्य से लगभग 10 अंश के भीतर आने पर दहनग्रस्त माना जाता है।

क्या शुक्र अस्त हमेशा नकारात्मक होता है?

नहीं। यदि शुक्र अपनी राशि या उच्च राशि में हो तो सकारात्मक परिणाम दे सकता है।

शुक्र अस्त जीवन को कैसे प्रभावित करता है?

विवाह में गलतफहमी, आर्थिक सुख में कमी और कला क्षेत्र में पहचान में देरी हो सकती है।

क्या शुक्र अस्त विवाह के लिए हानिकारक है?

संबंधों में चुनौतियाँ आ सकती हैं, लेकिन अंतिम परिणाम पूरी कुंडली पर निर्भर करता है।

क्या शुक्र अस्त प्रेम जीवन को प्रभावित करता है?

हाँ, संचार की कमी या गलतफहमी हो सकती है।

क्या उपाय से शुक्र मजबूत हो सकता है?

शुक्र मंत्र, माता लक्ष्मी की पूजा और उपयुक्त होने पर हीरा या सफेद पुखराज धारण करना लाभकारी है।

शुक्र कितने समय तक अस्त रहता है?

सूर्य के निकट रहने की गोचर अवधि में शुक्र अस्त रहता है।