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मंगल अस्त – वैदिक ज्योतिष में मंगल दहन की पूरी जानकारी

वैदिक ज्योतिष में मंगल अस्त तब होता है जब मंगल सूर्य के अत्यंत निकट आ जाता है और उसकी तेजस्विता के कारण अपनी शक्ति खो देता है। इस स्थिति को अस्त कहा जाता है।

मंगल ऊर्जा, साहस, कार्रवाई, संपत्ति और दृढ़ता का कारक है। मंगल अस्त होने पर इसकी अग्नि ऊर्जा आंतरिक हो सकती है।

मंगल अस्त का जन्म कुंडली में प्रभाव

दहनग्रस्त मंगल आत्मविश्वास, निर्णय क्षमता और संपत्ति मामलों को प्रभावित कर सकता है। इसका प्रभाव भाव स्थिति और दृष्टि पर निर्भर करता है।

मंगल कब दहनग्रस्त माना जाता है?

मंगल सामान्यतः सूर्य से लगभग १७ अंश के भीतर आने पर दहनग्रस्त माना जाता है।

क्या मंगल अस्त हमेशा नकारात्मक होता है?

नहीं। यदि मंगल अपनी राशि या उच्च राशि में हो तो सकारात्मक परिणाम दे सकता है।

मंगल अस्त जीवन को कैसे प्रभावित करता है?

करियर में उतावले निर्णय, संबंधों में अहंकार और स्वास्थ्य में तनाव उत्पन्न हो सकता है।

क्या मंगल अस्त विवाह के लिए हानिकारक है?

अंतिम परिणाम पूरी कुंडली के विश्लेषण पर निर्भर करता है।

क्या मंगल अस्त क्रोध बढ़ाता है?

हाँ, असंतुलित स्थिति में क्रोध बढ़ सकता है।

क्या उपाय से मंगल मजबूत हो सकता है?

हनुमान चालीसा, मंगल मंत्र और उपयुक्त होने पर मूंगा धारण करना लाभकारी है।

मंगल कितने समय तक अस्त रहता है?

सूर्य के निकट रहने की गोचर अवधि में मंगल अस्त रहता है।