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विश्वकर्मा जयंती

परिचय
विश्वकर्मा जयंती हर वर्ष भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के शिल्पकार, इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। इस दिन उद्योग, मशीनरी और उपकरणों की पूजा की जाती है।

भगवान विश्वकर्मा कौन हैं?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा ब्रह्मा के मानस पुत्र हैं और उन्हें सृष्टि के पहले इंजीनियर माना जाता है। उन्होंने द्वारका, इंद्रप्रस्थ, पुष्पक विमान, और शिव का त्रिशूल जैसे दिव्य निर्माण किए।

पूजा का स्थान और महत्व
विश्वकर्मा पूजा खासतौर पर फैक्ट्रियों, वर्कशॉप्स, ऑफिसों और औद्योगिक प्रतिष्ठानों में होती है। लोग अपने औजारों, मशीनों की सफाई करके उनकी पूजा करते हैं।

मुख्य परंपराएं
लोग भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति स्थापित करके हवन और पूजा करते हैं। कामकाज में प्रयुक्त होने वाले औजारों को सजाया जाता है और उन पर तिलक करके प्रसाद चढ़ाया जाता है। कई स्थानों पर सामूहिक भोज का आयोजन होता है।

इस दिन का संदेश
विश्वकर्मा पूजा श्रम, निर्माण और कौशल की प्रतिष्ठा को बढ़ावा देती है। यह दिन कार्य और साधनों के प्रति सम्मान प्रकट करने का दिन है।

निष्कर्ष
विश्वकर्मा जयंती हमें प्रेरणा देती है कि श्रम और रचनात्मकता के बिना जीवन अधूरा है। यह दिन मेहनत और साधनों के महत्व को समझने का अवसर है।

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