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भारतीय ऋतु (६ ऋतु) २०२६ – वैदिक पंचांग की छह ऋतुएँ और उनका महत्व

पश्चिमी चार ऋतु प्रणाली से अलग, भारतीय परंपरा में वर्ष को छह ऋतुओं में विभाजित किया गया है, जिसे षड् ऋतु कहा जाता है।

प्रत्येक ऋतु लगभग दो महीने चलती है और जीवनशैली, स्वास्थ्य तथा त्योहारों को प्रभावित करती है।

छह भारतीय ऋतुएँ

१. वसंत ऋतु

मार्च–अप्रैल में नई शुरुआत और विकास का प्रतीक।

२. ग्रीष्म ऋतु

मई–जून में गर्मी और सूर्य ऊर्जा का समय।

३. वर्षा ऋतु

जुलाई–अगस्त में वर्षा और शुद्धि का काल।

४. शरद ऋतु

सितंबर–अक्टूबर में स्पष्टता और संतुलन।

५. हेमंत ऋतु

नवंबर–दिसंबर में शीतलता और शक्ति।

६. शिशिर ऋतु

जनवरी–फरवरी में अत्यधिक ठंड का समय।

आयुर्वेद में महत्व

प्रत्येक ऋतु शरीर के दोषों को प्रभावित करती है और आहार-विहार में परिवर्तन आवश्यक होता है।

भारत में छह ऋतुएँ क्यों हैं?

भौगोलिक और जलवायु विविधता के कारण।

प्रत्येक ऋतु कितने समय तक रहती है?

लगभग दो महीने।

क्या भारतीय ऋतुएँ पश्चिमी ऋतुओं से अलग हैं?

हाँ, भारतीय प्रणाली वर्ष को छह ऋतुओं में विभाजित करती है, जबकि पश्चिमी प्रणाली में चार ऋतुएँ होती हैं।

क्या ऋतुएँ आयुर्वेद में स्वास्थ्य को प्रभावित करती हैं?

हाँ, प्रत्येक ऋतु शरीर की संरचना को प्रभावित करती है और जीवनशैली में बदलाव की आवश्यकता होती है।

क्या त्योहार ऋतुओं से जुड़े होते हैं?

हाँ, कई भारतीय त्योहार ऋतु परिवर्तन से संबंधित हैं।