

भारतीय ऋतु २०२६ – हिंदू कैलेंडर की छह ऋतुएँ
पारंपरिक भारतीय पंचांग के अनुसार वर्ष को छह ऋतुओं में विभाजित किया गया है, जिन्हें षड् ऋतु कहा जाता है। ये ऋतुएँ सूर्य की गति और वर्षभर होने वाले मौसम परिवर्तन पर आधारित होती हैं।
प्रत्येक ऋतु लगभग दो महीनों की होती है और मौसम, कृषि और जीवनशैली से जुड़ी होती है। आयुर्वेद, त्योहार और भारतीय परंपराएँ भी इन ऋतुओं के अनुसार चलती हैं।
ऋतु परिवर्तन पर खगोलीय घटनाओं जैसे ग्रीष्म अयनांत (Summer Solstice) और शीत अयनांत (Winter Solstice) का भी प्रभाव माना जाता है।
ग्रीष्म अयनांत वह समय होता है जब सूर्य आकाश में सबसे उत्तरी स्थिति में होता है और वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है। शीत अयनांत वह समय होता है जब सूर्य दक्षिणी स्थिति में होता है और वर्ष का सबसे छोटा दिन होता है।
भारतीय पंचांग की छह ऋतुएँ
हिंदू कैलेंडर के अनुसार वर्ष को निम्नलिखित छह ऋतुओं में बाँटा गया है:
1. वसंत ऋतु (Spring)
वसंत ऋतु चैत्र और वैशाख महीनों में आती है।
यह फूलों के खिलने और सुखद मौसम का समय होता है।
2. ग्रीष्म ऋतु (Summer)
ग्रीष्म ऋतु ज्येष्ठ और आषाढ़ महीनों में आती है।
इस समय तापमान अधिक होता है
और मौसम गर्म व शुष्क होता है।
3. वर्षा ऋतु (Monsoon)
वर्षा ऋतु श्रावण और भाद्रपद महीनों में आती है।
इस समय वर्षा होती है
और कृषि कार्यों की शुरुआत होती है।
4. शरद ऋतु (Autumn)
शरद ऋतु आश्विन और कार्तिक महीनों में आती है।
वर्षा के बाद आकाश साफ होता है
और मौसम सुहावना हो जाता है।
5. हेमंत ऋतु (Pre-Winter)
हेमंत ऋतु मार्गशीर्ष और पौष महीनों में आती है।
इस समय ठंड बढ़ने लगती है
और मौसम ठंडा हो जाता है।
6. शिशिर ऋतु (Winter)
शिशिर ऋतु माघ और फाल्गुन महीनों में आती है।
यह वर्ष की सबसे ठंडी ऋतु होती है।
छह ऋतुओं का महत्व
भारतीय संस्कृति में ऋतुओं का विशेष महत्व है। कृषि, आयुर्वेद और त्योहार सभी ऋतु परिवर्तन से जुड़े होते हैं।
भारतीय कैलेंडर में कितनी ऋतुएँ होती हैं?
पारंपरिक हिंदू पंचांग में वर्ष को छह ऋतुओं में विभाजित किया गया है।
भारतीय छह ऋतुओं के नाम क्या हैं?
वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर भारतीय वर्ष की छह ऋतुएँ हैं।
भारतीय परंपरा में छह ऋतुओं का क्या महत्व है?
छह ऋतुएँ कृषि, आयुर्वेद और कई हिंदू त्योहारों के समय निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।


