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पर्व का परिचय:
महासप्तमी नवरात्रि या दुर्गा पूजा का सातवां दिन होता है, जिसे आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। यह दिन दुर्गा पूजा के मुख्य अनुष्ठानों की शुरुआत का प्रतीक है और विशेष रूप से बंगाल, ओडिशा, असम और पूर्वी भारत में श्रद्धा से मनाया जाता है।

पौराणिक मान्यता:
देवी महात्म्य के अनुसार, इसी दिन देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच युद्ध की शुरुआत हुई थी। देवताओं ने देवी की स्तुति करके उन्हें अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए और दानवों का नाश करने का आह्वान किया। यह दिन अधर्म पर धर्म की विजय की ओर पहला कदम माना जाता है।

नवपत्रिका स्नान और कोला बऊ पूजा:
बंगाल में इस दिन सुबह-सुबह नवपत्रिका स्नान (कोला बऊ) की परंपरा होती है। नौ पौधों से मिलकर बनी नवपत्रिका को पवित्र जल में स्नान कराकर साड़ी पहनाई जाती है और गणेशजी के पास विराजित किया जाता है। इसे शक्ति और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है।

कैसे मनाया जाता है:
मंदिरों और पंडालों में विशेष सजावट की जाती है। भक्त देवी दुर्गा की पूजा करते हैं, सप्तशती का पाठ करते हैं, भोग अर्पित करते हैं और आरती करते हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रमों, धुनुची नृत्य और सामूहिक भोज का आयोजन होता है।

आध्यात्मिक महत्व:
यह दिन आत्मिक शक्ति के जागरण और नकारात्मकता के विनाश का प्रतीक है। देवी दुर्गा की पूजा से शक्ति, साहस और सुरक्षा का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

निष्कर्ष:
महासप्तमी अधर्म पर धर्म की विजय की शुरुआत का प्रतीक है। यह दिन आत्मबल, आस्था और मां दुर्गा के दिव्य रूप की आराधना का अवसर है।