हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को आमलकी एकादशी कहा जाता है।सभी एकादशियों में आमलकी एकादशी को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। इस एकादशी को कुछ लोग आंवला एकादशी या आमली ग्यारस के नाम से भी जानते हैं। इसे रंगभरी एकादशी भी कहा जाता है।
इस दिन उपवास किया जाता है और भगवान श्रीहरि विष्णु के साथ-साथ आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। ऐसा कहा जाता है कि आंवले का पेड़ भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस दिन पूजा के दौरान आमलकी एकादशी व्रत कथा का पाठ करना अत्यंत फलदायक माना गया है। इससे भगवान विष्णु तुरंत प्रसन्न हो जाते हैं। आइए जानते हैं आमलकी एकादशी की व्रत कथा...
आमलकी एकादशी व्रत कथा
पौराणिक मान्यता के अनुसार, वैदिश नामक एक नगर था। वहाँ ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र सभी धर्म परायण रहते थे। वहाँ का प्रत्येक नागरिक भगवान विष्णु का भक्त था और कोई भी नास्तिक नहीं था। उस नगर के राजा का नाम चैतरथ था। राजा बहुत विद्वान और धार्मिक था। नगर में कोई भी गरीब नहीं था और हर नागरिक एकादशी का व्रत करता था।
एक बार फाल्गुन महीने की आमलकी एकादशी आई। राजा और समस्त नगरवासियों ने इस व्रत को श्रद्धा से किया। सभी ने मंदिर जाकर आंवले के वृक्ष की पूजा की और रात्रि जागरण किया। उसी रात एक शिकारी, जो महापापी था, भूखा और प्यासा मंदिर में आ पहुंचा। वहाँ आकर वह एक कोने में बैठ गया और रात्रि जागरण देखने और भगवान विष्णु की कथा सुनने लगा।
इस तरह उसने पूरी रात जागते हुए भगवान की कथा सुनी। प्रातः सभी नगरवासी अपने घर लौट गए और शिकारी भी घर चला गया और भोजन कर लिया। कुछ समय पश्चात उस शिकारी की मृत्यु हो गई।
चूंकि उसने आमलकी एकादशी की कथा सुनी थी और जागरण किया था, इसलिए उसका अगला जन्म राजा विदूरत के घर में हुआ। उसका नाम वसुरथ रखा गया और वह बड़ा होकर उसी नगर का राजा बना।
एक दिन वह शिकार पर निकला और रास्ता भटक गया। थककर वह एक वृक्ष के नीचे सो गया। तभी वहाँ कुछ म्लेच्छ (दुष्ट लोग) आ पहुँचे। उन्होंने सोचा कि यह वही राजा है जिसकी वजह से हम देश से निकाले गए थे। उन्होंने राजा को मारने की योजना बनाई और राजा पर हथियार फेंकने लगे। लेकिन जैसे ही उन्होंने हथियार फेंके, वे फूल बनकर गिरने लगे।
थोड़ी ही देर में सभी म्लेच्छ जमीन पर मृत पड़े थे। जब राजा की नींद खुली, तो उसने देखा कि सभी लोग मृत पड़े हैं। वह चकित रह गया और सोचने लगा कि यह चमत्कार कैसे हुआ।
तभी आकाशवाणी हुई — "हे राजन! यह भगवान विष्णु की कृपा है। पिछले जन्म में तुमने आमलकी एकादशी की कथा सुनी थी और रात्रि जागरण किया था, उसी पुण्य के प्रभाव से आज तुम मृत्यु से बच पाए हो।"
राजा अपने नगर लौट आया और धर्मपूर्वक राज्य करने लगा।





