
सोमनाथ मंदिर
सोमनाथ
रात्रि भर की उपासना, व्रत और भक्ति के साथ महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की आराधना करें।

महाशिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित सबसे पवित्र रात्रि है, जो फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी को मनाई जाती है। भक्त रातभर जागकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं, ॐ नमः शिवाय का जाप करते हैं, और गहरी भक्ति के माध्यम से मोक्ष की कामना करते हैं। शुभ पंचांग पर सबसे शक्तिशाली शिवरात्रि लाइव दर्शन ऑनलाइन उपलब्ध है, ताकि विश्व भर के भक्त घर बैठे रात्रि पूजा में सम्मिलित हो सकें।
महाशिवरात्रि 2027 शनिवार, 6 मार्च 2027 को है। निशिता काल (मध्यरात्रि) पूजा सबसे शुभ समय है, जब भगवान शिव ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए माने जाते हैं। भक्त रातभर चार प्रहर पूजा करते हैं और शिवलिंग पर बिल्वपत्र, दूध, शहद, घी और जल अर्पित करते हैं।
शुभ पंचांग पर सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिरों का लाइव दर्शन देखें:
महाशिवरात्रि का व्रत स्त्री-पुरुष दोनों रखते हैं। भक्त सूर्योदय पर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनते हैं और दिन-रात का व्रत संकल्प लेते हैं। चार प्रहर पूजा सूर्यास्त के बाद आरंभ होती है — प्रत्येक प्रहर में दूध, दही, घी और शहद अर्पित किया जाता है। रातभर भक्त महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हैं, रुद्री पाठ पढ़ते हैं और शिव कथा सुनते हैं। विवाहित जोड़े वैवाहिक सुख के लिए मंदिर जाते हैं।
महाशिवरात्रि रात्रि दर्शन हिंदू धर्म के सबसे शक्तिशाली आध्यात्मिक अनुभवों में से एक है। लाइव ऑनलाइन दर्शन के माध्यम से जो भक्त ज्योतिर्लिंग मंदिरों तक नहीं पहुँच सकते, वे घर बैठे निशिता काल आरती, पवित्र अभिषेक और दिव्य वातावरण का अनुभव कर सकते हैं। शुभ मुहूर्त के लिए आज के पंचांग के साथ अपने दर्शन को जोड़ें, महाशिवरात्रि का पूर्ण महत्व पढ़ें, या अन्य हिंदू त्योहार देखें।
महाशिवरात्रि 2027 शनिवार, 6 मार्च 2027 को है। मध्यरात्रि का निशिता काल शिव पूजा का सबसे शुभ समय है।
महाशिवरात्रि 2028 बुधवार, 23 फ़रवरी 2028 को होने की संभावना है। सटीक तिथि स्थान के अनुसार बदल सकती है।
महाशिवरात्रि उस रात्रि का स्मरण है जब भगवान शिव ने तांडव किया था और इसे शिव-पार्वती का विवाह दिन भी माना जाता है। इस रात्रि की पूजा से नकारात्मक कर्म नष्ट होते हैं और मोक्ष प्राप्ति होती है।
शुभ पंचांग पर सोमनाथ, महाकालेश्वर (प्रसिद्ध भस्म आरती सहित), काशी विश्वनाथ और ओंकारेश्वर — बारह ज्योतिर्लिंगों में से चार का लाइव दर्शन उपलब्ध है।
भक्त दिनभर व्रत रखते हैं, शिवलिंग पर दूध, जल, शहद, घी और बिल्वपत्र से अभिषेक करते हैं, ॐ नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते हैं, और रात के चारों प्रहर जागरण करते हैं।
शिवरात्रि व्रत प्रायः निर्जला या फलाहार (फल और दूध) रखा जाता है। अन्न, नमक, प्याज-लहसुन का सेवन वर्जित है। चतुर्दशी तिथि समाप्त होने के बाद अगले दिन व्रत खोला जाता है।
हाँ — शुभ पंचांग पर सभी महाशिवरात्रि लाइव दर्शन विश्वभर के भक्तों के लिए पूर्णतः निःशुल्क हैं। कोई लॉगिन या सब्सक्रिप्शन आवश्यक नहीं है।
हाँ — लाइव दर्शन प्लेयर एंड्रॉइड, iPhone, टैबलेट और डेस्कटॉप पर काम करता है। बस किसी भी ब्राउज़र में मंदिर पेज खोलें।
भक्त पूजा कक्ष की सफाई करते हैं, शिवलिंग या शिव चित्र स्थापित करते हैं, अभिषेक करते हैं, दीपक जलाते हैं, बिल्वपत्र और फल अर्पित करते हैं, मंत्र जाप करते हैं और शिवरात्रि कथा पढ़ते या सुनते हैं।
निशिता काल (लगभग मध्यरात्रि) सबसे शक्तिशाली मुहूर्त है। चार-प्रहर पूजा पूरी रात चलती है — प्रत्येक प्रहर लगभग तीन घंटे का होता है और भिन्न पवित्र अर्पण से किया जाता है।