कृष्ण सप्तमी - हरियाना दिवस, कर्नाटका राज्योत्सव, केरळ पिरवी, चावंग कुट
मिथुन
कृष्ण अष्टमी
कर्क
कृष्ण नवमी
कर्क
कृष्ण दशमी
सिंह
कृष्ण एकादशी - राम एकादशी, वाघ बारस
सिंह
कृष्ण द्वादशी - धनतेरस
कन्या
कृष्ण त्रयोदशी - काली चौदस
कन्या
कृष्ण चतुर्दशी - दिवाली, शारदा पूजन
तुला
कृष्ण अमावस
तुला
शुक्ल प्रतिपदा - नूतन वर्ष प्रारम्भ, अन्नकूट उत्सव
तुला
शुक्ल द्वितीया - भाई दूज
वृश्चिक
शुक्ल तृतीया
वृश्चिक
शुक्ल चतुर्थी
धनु
शुक्ल पंचमी - लाभ पंचमी, आज दूसरा शनिवार होने के कारण बैंक बंद रहेगा।
धनु
शुक्ल षष्ठी - छठ पूजा
धनु
शुक्ल सप्तमी
मकर
शुक्ल अष्टमी
मकर
शुक्ल नवमी
कुंभ
शुक्ल नवमी
कुंभ
शुक्ल दशमी - प्रबोधिनी एकादशी
कुंभ
शुक्ल द्वादशी - तुलसी विवाह प्रारंभ
मीन
शुक्ल त्रयोदशी
मीन
शुक्ल चतुर्दशी
मेष
शुक्ल पूर्णिमा - तुलसी विवाह समाप्ति, देव दीपावली, गुरु नानक जयंती, श्री गुरु तेग बहादुरजी शहीदी दिवस
मेष
कृष्ण प्रतिपदा
वृषभ
कृष्ण द्वितीया
वृषभ
कृष्ण तृतीया - कनकदास जयंती
मिथुन
कृष्ण पंचमी - आज चौथा शनिवार होने के कारण बैंक बंद रहेगा।
मिथुन
कृष्ण षष्ठी
कर्क
कृष्ण सप्तमी
कर्क
इस महीने आने वाले त्यौहार और छुट्टियाँ
१५
नवंबर, २०२६
रविवार
अमांत: कार्तिक शुक्ल षष्ठीपूर्णिमांत: कार्तिक शुक्ल षष्ठी
विक्रम संवत २०८३

सूर्योदय और सूर्यास्त
त्योहार और छुट्टियां
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दैनिक पंचांग विवरण
इस महीने आने वाले त्यौहार और छुट्टियाँ
१५ नवंबर २०२६ का पंचांग
१५ नवंबर २०२६ को रविवार है। यह दिन कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष में आता है। १५ नवंबर २०२६ की तिथि शुक्ल पक्ष षष्ठी है, जो १२:०० पूर्वाह्न तक रहेगी। इस दिन का नक्षत्र उत्तराषाढ़ा है, जो ११:२८ अपराह्न के बाद श्रवण में बदलेगा। राहु काल ०४:३५ PM से ०५:५८ PM तक रहेगा।
| वार | रविवार |
|---|---|
| माह | नवंबर २०२६ |
| तिथि | षष्ठी |
| नक्षत्र | उत्तराषाढ़ा (११:२८ अपराह्न तक; फिर श्रवण) |
| योग | शूल (०६:२१ पूर्वाह्न तक; फिर गण्ड) |
| करण | तैतिल (१२:०० पूर्वाह्न तक; फिर गारा) |
| पक्ष | शुक्ल |
| मास | कार्तिक |
| राहु काल | ०४:३५ PM – ०५:५८ PM |
| गुलिक काल | ०३:११ PM – ०४:३५ PM |
| यमगण्ड काल | १२:२४ PM – ०१:४८ PM |
| अभिजीत मुहूर्त | १२:०२ PM – १२:४६ PM |
| ब्रह्म मुहूर्त | ०५:१४ AM – ०६:०२ AM |
| सूर्योदय | ०६:५० AM |
| सूर्यास्त | ०५:५८ PM |
| चंद्र राशि | धनु (०३:११ पूर्वाह्न तक; फिर मकर) |
| शुभ रंग | लाल |
| विक्रम संवत | २०८३ |
| शक संवत | १९४८ |
१५ नवंबर २०२६ को क्या है?
१५ नवंबर २०२६ को रविवार है। इस दिन का नक्षत्र उत्तराषाढ़ा, योग शूल, चंद्र राशि धनु है। इस दिन छठ पूजा का पर्व है।
१५ नवंबर २०२६ को कौन-सी तिथि है?
१५ नवंबर २०२६ को शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि है। यह तिथि १२:०० पूर्वाह्न तक रहेगी। सभी स्कंद षष्ठी तिथियाँ देखें। आज की सटीक तिथि और उसका समय जानने के लिए आज की तिथि पेज देखें।
१५ नवंबर २०२६ का नक्षत्र क्या है?
१५ नवंबर २०२६ का नक्षत्र उत्तराषाढ़ा है। ११:२८ अपराह्न के बाद श्रवण नक्षत्र प्रारंभ होगा। नक्षत्र चंद्रमा की आकाशीय स्थिति को दर्शाता है और पूजा, विवाह एवं यात्रा के मुहूर्त में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
१५ नवंबर २०२६ का राहु काल क्या है?
१५ नवंबर २०२६ का राहु काल ०४:३५ PM से ०५:५८ PM तक है। राहु काल में शुभ कार्य, यात्रा और नए उपक्रम आरंभ करने से बचना चाहिए। शुभ चौघड़िया देखने के लिए चौघड़िया पृष्ठ देखें।
१५ नवंबर २०२६ का शुभ मुहूर्त क्या है?
१५ नवंबर २०२६ का अभिजीत मुहूर्त १२:०२ PM से १२:४६ PM तक है — यह दिन का सर्वश्रेष्ठ शुभ काल माना जाता है। ब्रह्म मुहूर्त ०५:१४ AM से ०६:०२ AM तक है, जो ध्यान, पूजा और सकारात्मक कार्यों के लिए उत्तम है। विस्तृत मुहूर्त सूची के लिए शुभ मुहूर्त पृष्ठ देखें।
१५ नवंबर २०२६ के शुभ और अशुभ समय
शुभ समय: अभिजीत मुहूर्त (१२:०२ PM – १२:४६ PM), ब्रह्म मुहूर्त (०५:१४ AM – ०६:०२ AM), शुभ रंग लाल।
अशुभ समय: राहु काल (०४:३५ PM – ०५:५८ PM), गुलिक काल (०३:११ PM – ०४:३५ PM), यमगण्ड काल (१२:२४ PM – ०१:४८ PM)।
क्या १५ नवंबर २०२६ का पंचांग शहर के अनुसार बदलता है?
हाँ, १५ नवंबर २०२६ का पंचांग शहर के अनुसार बदल सकता है। पंचांग की गणना सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रहों की स्थिति पर आधारित होती है, जो हर स्थान पर अलग होती है। शुभ पंचांग चयनित शहर के अनुसार सटीक पंचांग प्रदान करता है।
१५ नवंबर २०२६ का पंचांग कैसे गणना किया जाता है?
पंचांग की गणना दृक गणित पद्धति पर आधारित है, जो सूर्योदय, सूर्यास्त और ग्रहों की वास्तविक खगोलीय स्थितियों का उपयोग करती है। तिथि चंद्रमा और सूर्य के कोणीय अंतर से, नक्षत्र चंद्र की राशि स्थिति से, और योग दोनों ग्रहों की संयुक्त गति से निर्धारित होता है।
पंचांग क्या है और इसका महत्व क्या है?
पंचांग वैदिक समय गणना प्रणाली है, जो तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार के आधार पर दिन की शुभता और अशुभता को दर्शाती है। इसका उपयोग पूजा, व्रत, मुहूर्त, यात्रा और अन्य धार्मिक कार्यों के लिए किया जाता है।
पंचांग क्या है, इसे कैसे पढ़ें और इसका महत्व विस्तार से समझने के लिए यहाँ पढ़ें।





