

वैदिक ज्योतिष में शनि वक्री का अर्थ है पृथ्वी से देखने पर शनि का पीछे की ओर चलता हुआ दिखाई देना। यह दृश्य भ्रम है, लेकिन इसका कर्मिक प्रभाव अत्यंत गहरा होता है।
शनि कर्म, अनुशासन, जिम्मेदारी, विलंब और दीर्घकालिक सफलता का कारक है। शनि वक्री होने पर अधूरे कार्य और जिम्मेदारियाँ पुनः सामने आ सकती हैं।
वक्री शनि करियर, आर्थिक स्थिरता और धैर्य को प्रभावित कर सकता है। यह देरी और पुनरावृत्ति ला सकता है।
शनि प्रति वर्ष लगभग एक बार वक्री होता है और लगभग ४ से ५ महीनों तक वक्री रहता है।
नहीं। वक्री शनि आंतरिक रूप से शक्तिशाली होता है और परिपक्वता प्रदान करता है।
करियर में देरी, जिम्मेदारियों में वृद्धि और आध्यात्मिक विकास हो सकता है।
देरी संभव है, लेकिन अंतिम परिणाम पूरी कुंडली पर निर्भर करता है।
हाँ, अधूरे कर्म पुनः सामने आ सकते हैं।
शनि मंत्र, तेल अर्पण और उपयुक्त होने पर नीलम धारण करना लाभकारी है।
यह आंतरिक रूप से शक्तिशाली माना जाता है, लेकिन परिणाम में देरी हो सकती है।