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मंगल वक्री (Mars Vakri) – वैदिक ज्योतिष में मंगल की वक्री चाल

वैदिक ज्योतिष में मंगल वक्री का अर्थ है पृथ्वी से देखने पर मंगल का पीछे की ओर चलता हुआ दिखाई देना। यह केवल दृश्य भ्रम है, लेकिन ज्योतिष में इसका प्रभाव अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है।

मंगल साहस, क्रिया, संपत्ति, प्रतिस्पर्धा और ऊर्जा का कारक है। मंगल वक्री होने पर इसकी ऊर्जा आंतरिक हो सकती है।

मंगल वक्री का जन्म कुंडली में प्रभाव

वक्री मंगल क्रोध, निर्णय क्षमता और संपत्ति मामलों को प्रभावित कर सकता है। इसका प्रभाव भाव स्थिति और दृष्टि पर निर्भर करता है।

मंगल कितने समय बाद वक्री होता है?

मंगल लगभग हर 26 महीनों में एक बार वक्री होता है और लगभग 60 से 80 दिनों तक वक्री रहता है।

क्या मंगल वक्री हमेशा नकारात्मक होता है?

नहीं। वक्री मंगल आंतरिक रूप से शक्तिशाली होता है, लेकिन असंतुलित स्थिति में तनाव दे सकता है।

मंगल वक्री जीवन को कैसे प्रभावित करता है?

करियर में देरी, संबंधों में अहंकार और स्वास्थ्य में तनाव उत्पन्न हो सकता है।

क्या मंगल वक्री विवाह के लिए हानिकारक है?

अंतिम परिणाम पूरी कुंडली के विश्लेषण पर निर्भर करता है।

क्या मंगल वक्री क्रोध बढ़ाता है?

हाँ, आंतरिक आक्रामकता बढ़ सकती है।

क्या उपाय से मंगल मजबूत हो सकता है?

मंगल मंत्र, हनुमान चालीसा और उपयुक्त होने पर मूंगा धारण करना लाभकारी है।

क्या वक्री मंगल अधिक शक्तिशाली होता है?

हाँ, यह आंतरिक रूप से शक्तिशाली माना जाता है, लेकिन परिणाम में विलंब हो सकता है।