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रवि पुष्य योग २०२६ – रविवार और पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग

वैदिक ज्योतिष में रवि पुष्य योग अत्यंत शुभ योगों में से एक माना जाता है। यह तब बनता है जब पुष्य नक्षत्र रविवार के दिन आता है। यह दुर्लभ संयोग समृद्धि, सफलता और स्थायी लाभ देने वाला माना जाता है।

पुष्य नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति ग्रह है जो ज्ञान और वृद्धि का प्रतीक है, जबकि रविवार सूर्य का दिन है जो शक्ति, प्रतिष्ठा और नेतृत्व का प्रतिनिधित्व करता है। इन दोनों का संयोग अत्यंत शुभ मुहूर्त बनाता है।

गुरु पुष्य योग, रवि पुष्य योग की तरह ही एक अत्यंत शुभ योग माना जाता है। जब गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र पड़ता है तब गुरु पुष्य योग बनता है और इसे नए कार्यों की शुरुआत तथा खरीदारी के लिए बहुत शुभ माना जाता है।

खगोलीय आधार

जब चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में गोचर करता है और उसी दिन रविवार होता है, तब रवि पुष्य योग बनता है। चंद्रमा प्रतिदिन लगभग १३°२०′ चलता है, इसलिए यह योग वर्ष में कुछ ही बार बनता है।

ज्योतिषीय महत्व

रवि पुष्य योग को निवेश, व्यापार प्रारंभ, सोना या संपत्ति खरीदने तथा धार्मिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

इस योग में किए जाने वाले शुभ कार्य

इस समय लोग व्यापार प्रारंभ, कीमती वस्तुओं की खरीद, आध्यात्मिक साधना और दीर्घकालीन निवेश करते हैं।

रवि पुष्य योग कब बनता है?

रवि पुष्य योग तब बनता है जब रविवार के दिन चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में होता है। वैदिक ज्योतिष में इसे अत्यंत शुभ योग माना जाता है और इस दिन नए कार्यों की शुरुआत, निवेश और खरीदारी करना लाभदायक माना जाता है।

यह योग कितनी बार बनता है?

रवि पुष्य योग तब बनता है जब रविवार और पुष्य नक्षत्र का संयोग होता है। सामान्यतः यह योग वर्ष में लगभग 1 से 3 बार बन सकता है।

रवि पुष्य योग क्यों शुभ माना जाता है?

रवि पुष्य योग को वैदिक ज्योतिष में अत्यंत शुभ योग माना जाता है क्योंकि इसमें सूर्य (रवि) और पुष्य नक्षत्र का विशेष संयोग होता है। सूर्य को शक्ति, प्रतिष्ठा और सफलता का कारक माना जाता है, जबकि पुष्य नक्षत्र समृद्धि, पोषण और विकास का प्रतीक है। जब ये दोनों एक साथ आते हैं तो यह योग जीवन में उन्नति, धन लाभ और शुभ परिणाम देने वाला माना जाता है।

रवि पुष्य योग और गुरु पुष्य योग में क्या अंतर है?

रवि पुष्य योग तब बनता है जब रविवार को पुष्य नक्षत्र हो, जबकि गुरु पुष्य योग तब बनता है जब गुरुवार के दिन पुष्य नक्षत्र पड़ता है। दोनों ही योग वैदिक ज्योतिष में अत्यंत शुभ माने जाते हैं।