परिचय
योगी जयंती भगवान स्वामीनारायण के एक महान भक्त, शास्त्री योगीजी महाराज (योगीजी महाराज) की जन्म-जयंती के रूप में मनाई जाती है। वे स्वामीनारायण संप्रदाय के चौथे आध्यात्मिक आचार्य थे और अपने संपूर्ण जीवन को भक्ति, सेवा और सत्संग में समर्पित किया।
जीवन परिचय
योगीजी महाराज का जन्म 23 मई 1892 को गुजरात के पाटण जिले के धारी गांव में हरिप्रसादभाई और हेतबा माता के घर हुआ था। उनका बाल्य नाम जवेरभाई था। बचपन से ही उनमें ईश्वर भक्ति और सत्संग की प्रवृत्ति थी। मात्र 16 वर्ष की आयु में उन्होंने गढपुर में दीक्षा ली और शास्त्री पद प्राप्त किया।
समर्पण और तपस्या से भरा जीवन
योगीजी महाराज ने संत बनकर निस्वार्थ सेवा, भजन और धर्म प्रचार को ही जीवन का उद्देश्य माना। उन्होंने हमेशा प्रेम, क्षमा और करुणा से लोगों के जीवन को छुआ। उनका जीवन वाक्य था – "जीवों की सेवा ही मेरा धर्म है।"
संप्रदाय में योगदान
उन्होंने युवाओं में आध्यात्मिकता जगाई, देश-विदेश में हजारों युवाओं को संयमित जीवन की प्रेरणा दी और विश्वभर में मंदिरों एवं धार्मिक गतिविधियों का विस्तार किया। उनका मार्गदर्शन आज भी BAPS संस्थान द्वारा जीवंत बना हुआ है।
योगी जयंती समारोह
योगीजी महाराज की जयंती पर सत्संग सभाएं, भजन संध्या, सेवा अभियान और संस्कार शिबिरों का आयोजन होता है। यह दिन उनके जीवन से प्रेरणा लेने का अवसर होता है।
उनकी विरासत
उनके शिष्य प्रमुख स्वामी महाराज ने उनके कार्यों को आगे बढ़ाया और संप्रदाय को वैश्विक मंच पर स्थापित किया। योगीजी महाराज का जीवन आज भी लाखों को प्रेरित करता है।




