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चंद्र राशि गोचर (Chandra Gochar) – वैदिक ज्योतिष में चंद्र का राशि परिवर्तन

वैदिक ज्योतिष में चंद्र राशि गोचर का अर्थ है चंद्रमा का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश। चंद्रमा लगभग हर 2.25 दिनों में राशि बदलता है, इसलिए इसे सबसे तेज गति वाला ग्रह माना जाता है।

चंद्रमा मन, भावनाएँ, माता, कल्पना और मानसिक शांति का कारक है। जब चंद्रमा नई राशि में प्रवेश करता है, तो यह व्यक्ति की भावनात्मक स्थिति को प्रभावित करता है।

चंद्र राशि गोचर का महत्व

चंद्रमा दैनिक जीवन और मन का स्वामी है। इसका गोचर अल्पकालिक भावनाओं, मूड और दैनिक घटनाओं को दर्शाता है। शुभ समय चयन में चंद्र गोचर महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

चंद्र गोचर के दौरान क्या होता है?

चंद्रमा के राशि परिवर्तन से मानसिक स्थिति में तेज बदलाव आता है। इसका प्रभाव विशेष रूप से चंद्र राशि से जिस भाव में गोचर होता है उस पर निर्भर करता है।

चंद्र गोचर भावनात्मक प्रतिक्रियाएँ, दैनिक कार्य, परिवार संबंध और मानसिक शांति को प्रभावित करता है।

चंद्र गोचर प्रत्येक भाव में कैसे प्रभाव डालता है?

प्रथम भाव में चंद्र आत्म-जागरूकता बढ़ाता है। चतुर्थ भाव में घर और परिवार पर ध्यान देता है। सप्तम भाव में संबंध सक्रिय होते हैं। अष्टम भाव में भावनात्मक उतार-चढ़ाव हो सकता है।

क्या चंद्र गोचर हमेशा शुभ होता है?

नहीं। यदि चंद्रमा छठे, आठवें या बारहवें भाव में गोचर करे, तो मानसिक तनाव या असुविधा दे सकता है। शुभ स्थान पर यह शांति और संतोष देता है।

चंद्र गोचर की गणना कैसे की जाती है?

चंद्र गोचर उसकी वास्तविक खगोलीय स्थिति के आधार पर निर्धारित होता है। वह लगभग २ से २.५ दिन एक राशि में रहता है और फिर अगली राशि में प्रवेश करता है।

चंद्रमा एक राशि में कितने समय तक रहता है?

चंद्रमा प्रत्येक राशि में लगभग 2.25 दिन रहता है।

क्या चंद्र गोचर सभी को समान रूप से प्रभावित करता है?

नहीं, इसका प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली और चंद्र राशि पर निर्भर करता है।

क्या चंद्र गोचर दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण है?

हाँ, चंद्रमा मन और दैनिक भावनाओं का कारक है, इसलिए इसका गोचर दैनिक निर्णय और मूड को प्रभावित करता है।