

वैदिक ज्योतिष में बुध राशि गोचर का अर्थ है बुध का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश। बुध सामान्यतः लगभग २३ से ३० दिनों में राशि बदलता है, हालांकि वक्री अवस्था में अवधि बदल सकती है।
बुध बुद्धि, संचार, वाणी, व्यापार, शिक्षा, विश्लेषण क्षमता और निर्णय शक्ति का कारक है। जब बुध नई राशि में प्रवेश करता है, तो वह जन्म कुंडली के अनुसार ज्ञान और संचार से जुड़े क्षेत्रों को सक्रिय करता है।
बुध ज्ञान और वाणिज्य का ग्रह है। इसका गोचर अध्ययन, वार्ता और मानसिक सक्रियता का संकेत देता है। यह छात्रों और व्यापारियों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है।
बुध के राशि परिवर्तन से सोचने की शैली, संचार और निर्णय प्रक्रिया में बदलाव आता है। इसका प्रभाव लग्न और चंद्र राशि से जिस भाव में गोचर होता है उस पर निर्भर करता है।
बुध गोचर व्यापारिक सौदे, अनुबंध, अध्ययन, यात्रा, नेटवर्किंग और वित्तीय योजना को प्रभावित कर सकता है।
प्रथम भाव में बुध बुद्धिमत्ता और अभिव्यक्ति बढ़ाता है। तृतीय भाव में संचार और छोटी यात्राओं में लाभ देता है। षष्ठम भाव में प्रतियोगी परीक्षाओं में सहायता करता है। दशम भाव में करियर और व्यापार में प्रगति देता है।
हमेशा नहीं। यदि बुध चंद्र से आठवें या बारहवें भाव में गोचर करे, तो भ्रम या विलंब दे सकता है। शुभ स्थान में यह स्पष्टता और सफलता देता है।
बुध का गोचर उसकी वास्तविक खगोलीय स्थिति के आधार पर निर्धारित होता है। वह सामान्यतः 3 से 4 सप्ताह एक राशि में रहता है, लेकिन वक्री अवधि में समय बदल सकता है।
बुध प्रत्येक राशि में लगभग २३ से ३० दिन रहता है।
नहीं, इसका प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली, लग्न और ग्रह बल पर निर्भर करता है।
हाँ, क्योंकि बुध संचार और बुद्धि का कारक है, इसका गोचर व्यापार, शिक्षा और वित्तीय निर्णयों को प्रभावित करता है।