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मंगल राशि गोचर (Mangal Gochar) – वैदिक ज्योतिष में मंगल का राशि परिवर्तन

वैदिक ज्योतिष में मंगल राशि गोचर का अर्थ है मंगल का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश। मंगल सामान्यतः लगभग ४५ दिनों में राशि बदलता है, हालांकि वक्री अवस्था में अवधि बदल सकती है।

मंगल ऊर्जा, साहस, क्रिया, प्रतिस्पर्धा, भूमि, भाई-बहन और शारीरिक शक्ति का कारक है। जब मंगल नई राशि में प्रवेश करता है, तो वह जन्म कुंडली के अनुसार विभिन्न जीवन क्षेत्रों को सक्रिय करता है।

मंगल राशि गोचर का महत्व

मंगल क्रिया और दृढ़ता का ग्रह है। इसका गोचर ऊर्जावान समय, साहस और कभी-कभी टकराव का संकेत देता है। भूमि और विवाद से जुड़े मामलों में यह विशेष महत्वपूर्ण है।

मंगल गोचर के दौरान क्या होता है?

मंगल के राशि परिवर्तन से ऊर्जा, उत्साह और क्रियाशीलता बढ़ती है। इसका प्रभाव लग्न और चंद्र राशि से जिस भाव में गोचर होता है उस पर निर्भर करता है।

मंगल गोचर करियर निर्णय, विवाद, संपत्ति संबंधी मामले, महत्वाकांक्षा और स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।

मंगल गोचर प्रत्येक भाव में कैसे प्रभाव डालता है?

प्रथम भाव में मंगल आत्मविश्वास बढ़ाता है। चतुर्थ भाव में घर और संपत्ति को प्रभावित कर सकता है। सप्तम भाव में संबंधों में तनाव ला सकता है। दशम भाव में करियर महत्वाकांक्षा बढ़ा सकता है।

क्या मंगल गोचर हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है?

हमेशा नहीं। यदि मंगल चंद्र से तीसरे, छठे या ग्यारहवें भाव में हो, तो सफलता और विजय दे सकता है। लेकिन चौथे, आठवें या बारहवें भाव में तनाव ला सकता है।

मंगल गोचर की गणना कैसे की जाती है?

मंगल का गोचर उसकी वास्तविक खगोलीय स्थिति के आधार पर निर्धारित होता है। वह सामान्यतः लगभग १.५ महीने एक राशि में रहता है, लेकिन वक्री अवधि में समय बदल सकता है।

मंगल एक राशि में कितने समय तक रहता है?

मंगल सामान्यतः लगभग ४५ दिन प्रत्येक राशि में रहता है।

क्या मंगल गोचर सभी को समान रूप से प्रभावित करता है?

नहीं, इसका प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली, लग्न और ग्रह बल पर निर्भर करता है।

क्या मंगल गोचर करियर और संपत्ति के लिए महत्वपूर्ण है?

हाँ, क्योंकि मंगल क्रिया और भूमि का कारक है, इसका गोचर करियर और संपत्ति मामलों को प्रभावित करता है।