

वैदिक ज्योतिष में गुरु राशि गोचर का अर्थ है गुरु का एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करना। गुरु सामान्यतः लगभग ६ महीनों में राशि परिवर्तन करता है, इसलिए इसे महत्वपूर्ण मध्यम अवधि का गोचर माना जाता है।
गुरु ज्ञान, शिक्षा, धन, विवाह, संतान, आध्यात्मिकता, विस्तार और सौभाग्य का कारक है। जब गुरु नई राशि में प्रवेश करता है, तब जन्म कुंडली के अनुसार जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में वृद्धि और अवसर प्रदान करता है।
वैदिक ज्योतिष में गुरु को सबसे शुभ ग्रहों में से एक माना जाता है। इसका गोचर मध्यम अवधि में विकास, आशीर्वाद और सकारात्मक परिवर्तन का संकेत देता है। विशेष रूप से विवाह, संतान प्राप्ति और महत्वपूर्ण जीवन निर्णयों के लिए यह महत्वपूर्ण है।
जब गुरु एक राशि से दूसरी राशि में जाता है, तब यह विकास, आशावाद और सीखने के अवसर लाता है। इसके परिणाम इस बात पर निर्भर करते हैं कि यह आपकी लग्न और चंद्र राशि से किस भाव में स्थित है।
गुरु गोचर शिक्षा, करियर में उन्नति, आर्थिक स्थिरता, विवाह के योग और आध्यात्मिक प्रगति को प्रभावित कर सकता है।
प्रथम भाव में गुरु ज्ञान और आत्मविश्वास बढ़ाता है। द्वितीय भाव में धन और परिवार में वृद्धि देता है। पंचम भाव में शिक्षा और संतान के लिए शुभ होता है। दशम भाव में करियर विस्तार में लाभ देता है।
अधिकांशतः हाँ, क्योंकि गुरु स्वाभाविक रूप से शुभ ग्रह है। लेकिन यदि यह चंद्र राशि से छठे, आठवें या बारहवें भाव में गोचर करता है, तो यह अत्यधिक लाभ के बजाय मध्यम परिणाम दे सकता है।
गुरु गोचर की गणना उसकी वास्तविक खगोलीय स्थिति के आधार पर की जाती है। यह सामान्यतः लगभग ६ महीनों तक एक राशि में रहता है और फिर अगली राशि में प्रवेश करता है।
गुरु प्रत्येक राशि में लगभग ६ महीनों तक रहता है।
नहीं, इसका प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली, लग्न, चंद्र राशि और ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है।
हाँ, क्योंकि गुरु विकास, ज्ञान और आशीर्वाद का कारक है, इसलिए इसका गोचर विवाह, करियर विस्तार और आर्थिक स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।