

वैदिक ज्योतिष में सूर्य नक्षत्र गोचर का अर्थ है सूर्य का २७ नक्षत्रों में भ्रमण। सूर्य लगभग ३० दिनों में राशि बदलता है, लेकिन लगभग १३ से १४ दिनों में नक्षत्र बदलता है।
सूर्य आत्मा, पिता, सरकार, नेतृत्व, आत्मविश्वास और जीवन शक्ति का कारक है। जब सूर्य नए नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो उसके परिणाम उस नक्षत्र के देवता और स्वामी के अनुसार बदलते हैं।
नक्षत्र कर्मिक और मानसिक स्तर का प्रतिनिधित्व करते हैं। सूर्य के नक्षत्र परिवर्तन से उसके प्रभाव की प्रकृति बदलती है। यह गोचर राशि गोचर से अधिक सूक्ष्म फल देता है।
सूर्य के नक्षत्र परिवर्तन से आत्मविश्वास और प्रतिष्ठा में बदलाव आता है। इसका प्रभाव लग्न और चंद्र राशि से जिस भाव में गोचर होता है उस पर निर्भर करता है।
सूर्य नक्षत्र गोचर करियर प्रतिष्ठा, सरकारी कार्य, पिता से संबंध और स्वास्थ्य को प्रभावित करता है।
मजबूत नक्षत्र में सूर्य प्रतिष्ठा बढ़ाता है। संवेदनशील नक्षत्र में अहंकार या स्वास्थ्य समस्या दे सकता है। इसका प्रभाव जन्म कुंडली पर निर्भर करता है।
हाँ, विशेष रूप से अल्पकालिक घटनाओं, नेतृत्व परिवर्तन और सरकारी मामलों के लिए महत्वपूर्ण है। यह राशि गोचर की तुलना में अधिक विस्तृत फल देता है।
सूर्य की वास्तविक खगोलीय स्थिति के आधार पर इसकी गणना की जाती है। प्रत्येक नक्षत्र १३°२०′ का होता है, और सूर्य लगभग १३ से १४ दिन एक नक्षत्र में रहता है।
सूर्य प्रत्येक नक्षत्र में लगभग १३ से १४ दिन तक रहता है।
नहीं, इसका प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली और वर्तमान दशा पर निर्भर करता है।
हाँ, नक्षत्र गोचर अधिक सूक्ष्म और विस्तृत भविष्यवाणी प्रदान करता है।