

वैदिक ज्योतिष में बुध नक्षत्र गोचर का अर्थ है बुध का २७ नक्षत्रों में भ्रमण। बुध लगभग २३ से ३० दिनों में राशि बदलता है, लेकिन लगभग ४ से ७ दिनों में नक्षत्र बदलता है, जिसकी अवधि गति पर निर्भर करती है।
बुध बुद्धि, संचार, वाणी, व्यापार, विश्लेषण क्षमता और निर्णय शक्ति का कारक है। जब बुध नए नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो उसके फल उस नक्षत्र के देवता और स्वामी के अनुसार बदलते हैं।
नक्षत्र ग्रह की सूक्ष्म अभिव्यक्ति को दर्शाते हैं। बुध के नक्षत्र परिवर्तन से संचार की प्रभावशीलता बदलती है। यह गोचर राशि गोचर से अधिक सटीक फल देता है।
बुध के नक्षत्र परिवर्तन से सोचने की शैली और संचार में बदलाव आता है। इसका प्रभाव लग्न और चंद्र राशि से जिस भाव में गोचर होता है उस पर निर्भर करता है।
बुध नक्षत्र गोचर अध्ययन, व्यापारिक सौदे, अनुबंध, यात्रा और वित्तीय योजना को प्रभावित करता है।
शुभ नक्षत्र में बुध स्पष्टता और सफलता देता है। संवेदनशील नक्षत्र में भ्रम या गलतफहमी दे सकता है। इसका प्रभाव जन्म कुंडली पर निर्भर करता है।
हाँ, विशेष रूप से परीक्षा, साक्षात्कार और व्यापारिक निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण है। यह राशि गोचर की तुलना में अधिक विस्तृत समय देता है।
बुध की वास्तविक खगोलीय स्थिति के आधार पर इसकी गणना की जाती है। प्रत्येक नक्षत्र १३°२०′ का होता है, और बुध लगभग ४ से ७ दिन एक नक्षत्र में रहता है।
बुध प्रत्येक नक्षत्र में लगभग ४ से ७ दिन तक रहता है।
नहीं, इसका प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली, ग्रह बल और वर्तमान दशा पर निर्भर करता है।
हाँ, नक्षत्र गोचर अधिक सूक्ष्म और घटना-आधारित भविष्यवाणी प्रदान करता है।