

वैदिक ज्योतिष में मंगल नक्षत्र गोचर का अर्थ है मंगल का २७ नक्षत्रों में भ्रमण। मंगल लगभग ४५ दिनों में राशि बदलता है, लेकिन लगभग १५ से २० दिनों में नक्षत्र बदलता है, जिसकी अवधि गति पर निर्भर करती है।
मंगल ऊर्जा, साहस, क्रिया, भूमि, भाई-बहन और प्रतिस्पर्धा का कारक है। जब मंगल नए नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो उसके फल उस नक्षत्र के देवता और स्वामी के अनुसार बदलते हैं।
नक्षत्र ग्रह के सूक्ष्म और कर्मिक स्तर को दर्शाते हैं। मंगल के नक्षत्र परिवर्तन से उसकी ऊर्जा की दिशा बदलती है। यह गोचर राशि गोचर से अधिक सटीक फल देता है।
मंगल के नक्षत्र परिवर्तन से प्रेरणा और आत्मविश्वास में बदलाव आता है। इसका प्रभाव लग्न और चंद्र राशि से जिस भाव में गोचर होता है उस पर निर्भर करता है।
मंगल नक्षत्र गोचर विवाद, प्रतिस्पर्धा, भूमि संबंधी मामलों और स्वास्थ्य ऊर्जा को प्रभावित करता है।
मजबूत नक्षत्र में मंगल साहस और सफलता देता है। संवेदनशील नक्षत्र में विवाद या तनाव दे सकता है। इसका प्रभाव जन्म कुंडली पर निर्भर करता है।
हाँ, विशेष रूप से अल्पकालिक योजना, प्रतियोगी परीक्षा और भूमि संबंधी निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण है। यह राशि गोचर की तुलना में अधिक विस्तृत समय देता है।
मंगल की वास्तविक खगोलीय स्थिति के आधार पर इसकी गणना की जाती है। प्रत्येक नक्षत्र १३°२०′ का होता है, और मंगल लगभग १५ से २० दिन एक नक्षत्र में रहता है।
मंगल प्रत्येक नक्षत्र में लगभग १५ से २० दिन तक रहता है।
नहीं, इसका प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली, ग्रह बल और वर्तमान दशा पर निर्भर करता है।
हाँ, नक्षत्र गोचर अधिक सूक्ष्म और घटना-आधारित भविष्यवाणी प्रदान करता है।