

वैदिक ज्योतिष में केतु नक्षत्र गोचर का अर्थ है केतु का २७ नक्षत्रों में भ्रमण। केतु लगभग १८ महीनों में राशि बदलता है, और लगभग 9 महीने एक नक्षत्र में रहता है। केतु सदैव वक्री गति में चलता है।
केतु आध्यात्मिकता, वैराग्य, पूर्व जन्म कर्म, अंतर्ज्ञान, अचानक अलगाव और मोक्ष का कारक है। जब केतु नए नक्षत्र में प्रवेश करता है, तो उसके फल उस नक्षत्र के देवता और स्वामी के अनुसार बदलते हैं।
नक्षत्र ग्रह के कर्मिक क्षेत्र को दर्शाते हैं। केतु के नक्षत्र परिवर्तन से कर्मिक शुद्धि और वैराग्य की दिशा बदलती है। यह गोचर राशि गोचर से अधिक सटीक फल देता है।
केतु के नक्षत्र परिवर्तन से वैराग्य और आंतरिक परिवर्तन होता है। इसका प्रभाव लग्न और चंद्र राशि से जिस भाव में गोचर होता है उस पर निर्भर करता है।
केतु नक्षत्र गोचर अचानक समाप्ति, आध्यात्मिक विकास, शोध और गुप्त ज्ञान को प्रभावित करता है।
शुभ नक्षत्र में केतु आध्यात्मिक जागरण देता है। संवेदनशील नक्षत्र में भ्रम या एकांत दे सकता है। इसका प्रभाव जन्म कुंडली पर निर्भर करता है।
हाँ, विशेष रूप से आध्यात्मिक विकास, कर्मिक मुक्ति और जीवन दिशा परिवर्तन के लिए महत्वपूर्ण है। यह राशि गोचर की तुलना में अधिक गहन समय विश्लेषण देता है।
केतु की खगोलीय स्थिति के आधार पर इसकी गणना की जाती है। प्रत्येक नक्षत्र १३°२०′ का होता है, और केतु लगभग 9 महीने एक नक्षत्र में रहता है।
केतु प्रत्येक नक्षत्र में लगभग 9 महीने तक रहता है।
नहीं, इसका प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली, ग्रह बल और वर्तमान दशा पर निर्भर करता है।
हाँ, नक्षत्र गोचर अधिक सूक्ष्म और कर्मिक-आधारित भविष्यवाणी प्रदान करता है।