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शुक्र नक्षत्र पद गोचर (Shukra Nakshatra Pada Gochar) – वैदिक ज्योतिष में शुक्र का पद परिवर्तन

वैदिक ज्योतिष में शुक्र नक्षत्र पद गोचर का अर्थ है शुक्र का नक्षत्र के चार पदों में भ्रमण। शुक्र लगभग २३ से ३० दिनों तक एक राशि में रहता है। प्रत्येक नक्षत्र १३°२०′ और प्रत्येक पद ३°२०′ का होता है, इसलिए शुक्र लगभग १० से १२ दिन एक नक्षत्र में और लगभग २ से ३ दिन एक पद में रहता है।

शुक्र प्रेम, विवाह, विलासिता, सौंदर्य और रचनात्मकता का कारक है। नए पद में प्रवेश करने पर भावनात्मक और वित्तीय प्राथमिकताओं में बदलाव आता है।

शुक्र नक्षत्र पद गोचर का महत्व

यह गोचर विवाह और संबंधों के लिए सही समय चुनने में महत्वपूर्ण है। यह दैनिक स्तर पर सटीक समय प्रदान करता है।

नक्षत्र पद क्या है?

प्रत्येक नक्षत्र चार भागों में विभाजित होता है। प्रत्येक पद ३°२०′ का होता है और नवांश राशि से संबंधित होता है।

शुक्र नक्षत्र पद गोचर के दौरान क्या होता है?

शुक्र के पद परिवर्तन से संबंध और वित्तीय निर्णयों में बदलाव आता है। इसका प्रभाव लग्न और चंद्र राशि से जिस भाव में गोचर होता है उस पर निर्भर करता है।

शुक्र पद गोचर विवाह, प्रेम संबंध और विलासिता खर्च को प्रभावित करता है।

शुक्र नक्षत्र पद गोचर की गणना कैसे की जाती है?

शुक्र की खगोलीय स्थिति के आधार पर इसकी गणना की जाती है। प्रत्येक पद ३°२०′ का होता है, और शुक्र लगभग २ से ३ दिन एक पद में रहता है।

शुक्र एक पद में कितने समय तक रहता है?

शुक्र प्रत्येक पद में लगभग २ से ३ दिन तक रहता है।

क्या इसका प्रभाव सभी पर समान होता है?

नहीं, इसका प्रभाव जन्म कुंडली पर निर्भर करता है।

क्या पद गोचर अधिक सटीक है?

हाँ, यह अधिक सूक्ष्म समय निर्धारण देता है।