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सूर्य नक्षत्र पद गोचर (Surya Nakshatra Pada Gochar) – वैदिक ज्योतिष में सूर्य का पद परिवर्तन

वैदिक ज्योतिष में सूर्य नक्षत्र पद गोचर का अर्थ है सूर्य का नक्षत्र के चार पदों में भ्रमण। सूर्य लगभग ३० दिनों में राशि बदलता है और लगभग १३ से १४ दिनों में नक्षत्र बदलता है, जबकि लगभग ३ से ४ दिनों में एक पद बदलता है।

सूर्य आत्मा, आत्मविश्वास, प्रतिष्ठा, पिता और नेतृत्व का कारक है। जब सूर्य नए पद में प्रवेश करता है, तो अभिव्यक्ति और दिशा में सूक्ष्म परिवर्तन होता है।

सूर्य नक्षत्र पद गोचर का महत्व

पद गोचर बहुत सूक्ष्म समय निर्धारण देता है। विशेष रूप से इंटरव्यू, पदोन्नति और अधिकार संबंधी मामलों के लिए उपयोगी है।

नक्षत्र पद क्या है?

प्रत्येक नक्षत्र चार समान भागों में विभाजित होता है, जिन्हें पद कहा जाता है। प्रत्येक पद ३°२०′ का होता है और नवांश राशि से संबंधित होता है।

सूर्य नक्षत्र पद गोचर के दौरान क्या होता है?

सूर्य एक पद से दूसरे पद में जाता है तो आत्मविश्वास और निर्णयों में बदलाव आता है। इसका प्रभाव लग्न और चंद्र राशि से जिस भाव में गोचर होता है उस पर निर्भर करता है।

सूर्य पद गोचर करियर, सरकारी मामलों और सम्मान को प्रभावित करता है।

सूर्य नक्षत्र पद गोचर की गणना कैसे की जाती है?

सूर्य की खगोलीय स्थिति के आधार पर इसकी गणना की जाती है। प्रत्येक पद ३°२०′ का होता है, और सूर्य लगभग ३ से ४ दिन एक पद में रहता है।

सूर्य एक पद में कितने समय तक रहता है?

सूर्य प्रत्येक पद में लगभग ३ से ४ दिन तक रहता है।

क्या पद गोचर अधिक सटीक है?

हाँ, पद गोचर राशि और नक्षत्र गोचर से अधिक सटीक होता है।

क्या सूर्य पद गोचर सभी को समान रूप से प्रभावित करता है?

नहीं, इसका प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली और दशा पर निर्भर करता है।