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राहु नक्षत्र पद गोचर (Rahu Nakshatra Pada Gochar) – वैदिक ज्योतिष में राहु का पद परिवर्तन

वैदिक ज्योतिष में राहु नक्षत्र पद गोचर का अर्थ है राहु का नक्षत्र के चार पदों में भ्रमण। राहु एक छाया ग्रह है और सदैव वक्री गति में चलता है। यह लगभग १८.६ वर्षों में राशि चक्र पूर्ण करता है और लगभग १८ महीने एक राशि में रहता है। प्रत्येक नक्षत्र १३°२०′ और प्रत्येक पद ३°२०′ का होता है, इसलिए राहु लगभग ९ महीने एक नक्षत्र में और लगभग ३० से ४० दिन एक पद में रहता है।

राहु महत्वाकांक्षा, विदेशी संबंध, अचानक परिवर्तन और कर्मिक अनुभवों का कारक है। नए पद में प्रवेश करने पर इच्छाओं और जीवन दिशा में बदलाव आता है।

राहु नक्षत्र पद गोचर का महत्व

यह गोचर कर्मिक विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। यह मास-स्तरीय सटीक समय प्रदान करता है।

नक्षत्र पद क्या है?

प्रत्येक नक्षत्र चार भागों में विभाजित होता है। प्रत्येक पद ३°२०′ का होता है और नवांश राशि से संबंधित होता है।

राहु नक्षत्र पद गोचर के दौरान क्या होता है?

राहु के पद परिवर्तन से करियर और विदेश संबंधी मामलों में बदलाव आता है। इसका प्रभाव लग्न और चंद्र राशि से जिस भाव में गोचर होता है उस पर निर्भर करता है।

राहु पद गोचर अचानक अवसर और कर्मिक परीक्षाएँ देता है।

राहु नक्षत्र पद गोचर की गणना कैसे की जाती है?

राहु की वक्री गति के आधार पर इसकी गणना की जाती है। प्रत्येक पद ३°२०′ का होता है, और राहु लगभग ३० से ४० दिन एक पद में रहता है।

राहु एक पद में कितने समय तक रहता है?

राहु प्रत्येक पद में लगभग ३० से ४० दिन तक रहता है।

क्या इसका प्रभाव सभी पर समान होता है?

नहीं, इसका प्रभाव जन्म कुंडली पर निर्भर करता है।

क्या पद गोचर अधिक सटीक है?

हाँ, यह कर्मिक और चरणबद्ध समय निर्धारण देता है।