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बुध नक्षत्र पद गोचर (Budh Nakshatra Pada Gochar) – वैदिक ज्योतिष में बुध का पद परिवर्तन

वैदिक ज्योतिष में बुध नक्षत्र पद गोचर का अर्थ है बुध का नक्षत्र के चार पदों में भ्रमण। बुध सामान्यतः २० से ३० दिनों तक एक राशि में रहता है। प्रत्येक नक्षत्र १३°२०′ और प्रत्येक पद ३°२०′ का होता है, इसलिए बुध लगभग ७ से ९ दिन एक नक्षत्र में और लगभग २ से ४ दिन एक पद में रहता है।

बुध बुद्धि, संचार, व्यापार, तर्क, वाणी और विश्लेषण का कारक है। नए पद में प्रवेश करने पर सोच और संवाद शैली में परिवर्तन आता है।

बुध नक्षत्र पद गोचर का महत्व

यह गोचर संचार और समझौते के लिए सही समय चुनने में महत्वपूर्ण है। यह दैनिक स्तर पर सटीक समय देता है।

नक्षत्र पद क्या है?

प्रत्येक नक्षत्र चार भागों में विभाजित होता है। प्रत्येक पद ३°२०′ का होता है और नवांश राशि से संबंधित होता है।

बुध नक्षत्र पद गोचर के दौरान क्या होता है?

बुध के पद परिवर्तन से संचार और निर्णय प्रक्रिया में बदलाव आता है। इसका प्रभाव लग्न और चंद्र राशि से जिस भाव में गोचर होता है उस पर निर्भर करता है।

बुध पद गोचर व्यापार, अनुबंध, अध्ययन और चर्चाओं को प्रभावित करता है।

बुध नक्षत्र पद गोचर की गणना कैसे की जाती है?

बुध की खगोलीय स्थिति के आधार पर इसकी गणना की जाती है। प्रत्येक पद ३°२०′ का होता है, और बुध लगभग २ से ४ दिन एक पद में रहता है।

बुध एक पद में कितने समय तक रहता है?

बुध प्रत्येक पद में लगभग २ से ४ दिन तक रहता है।

क्या इसका प्रभाव सभी पर समान होता है?

नहीं, इसका प्रभाव जन्म कुंडली पर निर्भर करता है।

क्या पद गोचर अधिक सटीक है?

हाँ, यह अधिक सूक्ष्म समय निर्धारण देता है।