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मंगल नक्षत्र पद गोचर (Mangal Nakshatra Pada Gochar) – वैदिक ज्योतिष में मंगल का पद परिवर्तन

वैदिक ज्योतिष में मंगल नक्षत्र पद गोचर का अर्थ है मंगल का नक्षत्र के चार पदों में भ्रमण। मंगल लगभग 22 से 24 महीनों में राशि चक्र पूर्ण करता है। प्रत्येक नक्षत्र १३°२०′ और प्रत्येक पद ३°२०′ का होता है, इसलिए मंगल लगभग 15 से 20 दिन एक नक्षत्र में और लगभग ३ से ४ दिन एक पद में रहता है।

मंगल ऊर्जा, साहस, कार्रवाई, संपत्ति और दृढ़ता का कारक है। नए पद में प्रवेश करने पर निर्णय और क्रियाशीलता में परिवर्तन आता है।

मंगल नक्षत्र पद गोचर का महत्व

यह गोचर कार्य आरंभ करने, कानूनी मामलों और रणनीतिक निर्णय के लिए महत्वपूर्ण है।

नक्षत्र पद क्या है?

प्रत्येक नक्षत्र चार भागों में विभाजित होता है। प्रत्येक पद ३°२०′ का होता है और नवांश राशि से संबंधित होता है।

मंगल नक्षत्र पद गोचर के दौरान क्या होता है?

मंगल के पद परिवर्तन से निर्णय और क्रियात्मक व्यवहार में बदलाव आता है। इसका प्रभाव लग्न और चंद्र राशि से जिस भाव में गोचर होता है उस पर निर्भर करता है।

मंगल पद गोचर संपत्ति, प्रतिस्पर्धा और साहस को प्रभावित करता है।

मंगल नक्षत्र पद गोचर की गणना कैसे की जाती है?

मंगल की खगोलीय स्थिति के आधार पर इसकी गणना की जाती है। प्रत्येक पद ३°२०′ का होता है, और मंगल लगभग ३ से ४ दिन एक पद में रहता है।

मंगल एक पद में कितने समय तक रहता है?

मंगल प्रत्येक पद में लगभग ३ से ४ दिन तक रहता है।

क्या पद गोचर अधिक सटीक है?

हाँ, यह अधिक सूक्ष्म समय निर्धारण देता है।

क्या इसका प्रभाव सभी पर समान होता है?

नहीं, इसका प्रभाव जन्म कुंडली पर निर्भर करता है।