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गुरु नक्षत्र पद गोचर (Guru Nakshatra Pada Gochar) – वैदिक ज्योतिष में गुरु का पद परिवर्तन

वैदिक ज्योतिष में गुरु नक्षत्र पद गोचर का अर्थ है गुरु का नक्षत्र के चार पदों में भ्रमण। गुरु लगभग १२ वर्षों में राशि चक्र पूर्ण करता है और लगभग ६ महीने एक राशि में रहता है। प्रत्येक नक्षत्र १३°२०′ और प्रत्येक पद ३°२०′ का होता है, इसलिए गुरु लगभग 4 महीने एक नक्षत्र में और लगभग २५ से ३० दिन एक पद में रहता है।

गुरु ज्ञान, धन, विस्तार, विवाह, संतान और आध्यात्मिकता का कारक है। नए पद में प्रवेश करने पर जीवन की दिशा में सूक्ष्म परिवर्तन आता है।

गुरु नक्षत्र पद गोचर का महत्व

यह गोचर दीर्घकालिक निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण है। यह मास-स्तरीय सटीक समय प्रदान करता है।

नक्षत्र पद क्या है?

प्रत्येक नक्षत्र चार भागों में विभाजित होता है। प्रत्येक पद ३°२०′ का होता है और नवांश राशि से संबंधित होता है।

गुरु नक्षत्र पद गोचर के दौरान क्या होता है?

गुरु के पद परिवर्तन से शिक्षा, धन और आध्यात्मिक दिशा में बदलाव आता है। इसका प्रभाव लग्न और चंद्र राशि से जिस भाव में गोचर होता है उस पर निर्भर करता है।

गुरु पद गोचर विवाह, निवेश और उच्च शिक्षा को प्रभावित करता है।

गुरु नक्षत्र पद गोचर की गणना कैसे की जाती है?

गुरु की खगोलीय स्थिति के आधार पर इसकी गणना की जाती है। प्रत्येक पद ३°२०′ का होता है, और गुरु लगभग २५ से ३० दिन एक पद में रहता है।

गुरु एक पद में कितने समय तक रहता है?

गुरु प्रत्येक पद में लगभग २५ से ३० दिन तक रहता है।

क्या इसका प्रभाव सभी पर समान होता है?

नहीं, इसका प्रभाव जन्म कुंडली पर निर्भर करता है।

क्या पद गोचर अधिक सटीक है?

हाँ, यह अधिक सूक्ष्म समय निर्धारण देता है।