

वैदिक ज्योतिष में शुक्र वक्री का अर्थ है पृथ्वी से देखने पर शुक्र का पीछे की ओर चलता हुआ दिखाई देना। यह दृश्य भ्रम है, लेकिन इसका प्रभाव प्रेम और संबंधों पर गहरा पड़ता है।
शुक्र प्रेम, विवाह, सौंदर्य, विलासिता और रचनात्मकता का कारक है। शुक्र वक्री होने पर संबंध और वित्तीय मामलों में पुनर्विचार की आवश्यकता हो सकती है।
वक्री शुक्र प्रेम संबंध, विवाह और विलासिता को प्रभावित कर सकता है। पुराने संबंध पुनः सामने आ सकते हैं।
शुक्र लगभग हर 18 महीनों में एक बार वक्री होता है और लगभग 40 से 45 दिनों तक वक्री रहता है।
नहीं। यह भावनात्मक समझ बढ़ा सकता है और रचनात्मकता को गहरा कर सकता है।
संबंधों में गलतफहमी, खर्च में देरी और कला क्षेत्र में नई प्रेरणा मिल सकती है।
विवाह में देरी संभव है, लेकिन अंतिम परिणाम पूरी कुंडली पर निर्भर करता है।
हाँ, भावनात्मक पुनर्विचार हो सकता है।
शुक्र मंत्र, माता लक्ष्मी की पूजा और उपयुक्त होने पर हीरा धारण करना लाभकारी है।
यह आंतरिक रूप से शक्तिशाली माना जाता है, लेकिन परिणाम में देरी हो सकती है।