

वैदिक ज्योतिष में बुध वक्री का अर्थ है पृथ्वी से देखने पर बुध का पीछे की ओर चलता हुआ दिखाई देना। यह केवल दृश्य भ्रम है, लेकिन इसका प्रभाव ज्योतिष में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
बुध बुद्धि, संचार, व्यापार, अध्ययन और निर्णय क्षमता का कारक है। बुध वक्री होने पर संचार में भ्रम और देरी हो सकती है।
वक्री बुध संचार, व्यापार और शिक्षा को प्रभावित कर सकता है। निर्णयों में पुनर्विचार की स्थिति बन सकती है।
बुध प्रति वर्ष लगभग ३ से ४ बार वक्री होता है और लगभग २० से २४ दिनों तक वक्री रहता है।
नहीं। वक्री बुध आंतरिक रूप से शक्तिशाली होता है और विश्लेषण क्षमता बढ़ाता है।
करियर में गलतफहमी, संबंधों में संचार की कमी और अध्ययन में पुनरावृत्ति हो सकती है।
भ्रम या देरी हो सकती है, लेकिन सावधानी से प्रभाव कम किया जा सकता है।
हाँ, अनुबंधों और वित्तीय निर्णयों की समीक्षा आवश्यक है।
बुध मंत्र, भगवान विष्णु की पूजा और उपयुक्त होने पर पन्ना धारण करना लाभकारी है।
यह आंतरिक रूप से शक्तिशाली माना जाता है, लेकिन परिणाम में देरी हो सकती है।