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बुध वक्री – वैदिक ज्योतिष में बुध की वक्री चाल

वैदिक ज्योतिष में बुध वक्री का अर्थ है पृथ्वी से देखने पर बुध का पीछे की ओर चलता हुआ दिखाई देना। यह केवल दृश्य भ्रम है, लेकिन इसका प्रभाव ज्योतिष में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

बुध बुद्धि, संचार, व्यापार, अध्ययन और निर्णय क्षमता का कारक है। बुध वक्री होने पर संचार में भ्रम और देरी हो सकती है।

बुध वक्री का जन्म कुंडली में प्रभाव

वक्री बुध संचार, व्यापार और शिक्षा को प्रभावित कर सकता है। निर्णयों में पुनर्विचार की स्थिति बन सकती है।

बुध कितनी बार वक्री होता है?

बुध प्रति वर्ष लगभग ३ से ४ बार वक्री होता है और लगभग २० से २४ दिनों तक वक्री रहता है।

क्या बुध वक्री हमेशा नकारात्मक होता है?

नहीं। वक्री बुध आंतरिक रूप से शक्तिशाली होता है और विश्लेषण क्षमता बढ़ाता है।

बुध वक्री जीवन को कैसे प्रभावित करता है?

करियर में गलतफहमी, संबंधों में संचार की कमी और अध्ययन में पुनरावृत्ति हो सकती है।

क्या बुध वक्री संचार के लिए हानिकारक है?

भ्रम या देरी हो सकती है, लेकिन सावधानी से प्रभाव कम किया जा सकता है।

क्या बुध वक्री व्यापार को प्रभावित करता है?

हाँ, अनुबंधों और वित्तीय निर्णयों की समीक्षा आवश्यक है।

क्या उपाय से बुध मजबूत हो सकता है?

बुध मंत्र, भगवान विष्णु की पूजा और उपयुक्त होने पर पन्ना धारण करना लाभकारी है।

क्या वक्री बुध अधिक शक्तिशाली होता है?

यह आंतरिक रूप से शक्तिशाली माना जाता है, लेकिन परिणाम में देरी हो सकती है।