
विष्णु ध्यान मंत्र
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम् । विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् ॥ लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् । वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम् । विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् ॥ लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम् । वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम् ॥
शांत स्वरूप वाले, शेषशय्या पर विराजमान, पद्मनाभ, देवों के स्वामी, विश्व के आधार, गगन समान व्यापक, मेघ समान वर्ण वाले और सुंदर अंगों वाले; लक्ष्मीपति, कमलनयन, योगियों द्वारा ध्यान में प्राप्त होने वाले, संसार भय हरने वाले और सर्व लोकों के एकमात्र नाथ विष्णु को मैं वंदन करता हूँ।
जप गणक
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अर्थ और महत्व
लाभ
- विष्णु ध्यान मंत्र के माध्यम से भक्तिमय एकाग्रता में सहायक
- शांत और ध्यानपूर्वक जाप को प्रोत्साहित करता है
- नियमित प्रार्थना की आदत बनाने में सहायक
- पारंपरिक रूप से शांत और सर्वव्यापी स्वरूप में विष्णु का ध्यानमय चिंतन के भाव से जपा जाता है
जाप कैसे करें
- स्वच्छ और शांत स्थान पर आराम से बैठें और श्वास स्थिर करें
- कुछ धीमी साँसें लें और भगवान विष्णु का स्मरण करें
- विष्णु ध्यान मंत्र का धीरे और स्पष्ट उच्चारण करें, प्रत्येक शब्द को ध्यान से सुनें
- माला पर 108 जैसी स्थिर जाप संख्या रखें या अपनी दिनचर्या के अनुकूल छोटी निश्चित संख्या रखें
- गुरुवार और एकादशी पारंपरिक रूप से उपयुक्त माने जाते हैं और सुबह 6:00 व्यावहारिक दैनिक समय है; अंत में छोटी प्रार्थना के साथ शांत मन से पूर्ण करें
क्या करें
- जाप के लिए स्वच्छ और शांत स्थान चुनें
- स्पष्ट उच्चारण, स्थिर श्वास और एकाग्रता बनाए रखें
- ध्यान या ध्यान-मंत्र में देवता के स्वरूप का चिंतन करें और जाप के बाद कुछ क्षण शांत बैठें
- सच्ची श्रद्धा से और बिना जल्दबाजी के जाप करें
क्या न करें
- भारी भोजन के तुरंत बाद जाप करने से बचें
- केवल जाप की संख्या पूरी करने के लिए मंत्र का जल्दबाजी में जाप न करें
- जानबूझकर विचलित या अशांत मन से जाप करने से बचें
- ध्यान-आधारित जाप के तुरंत बाद जल्दबाजी में न उठें; कुछ क्षण शांत रहें
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विष्णु गायत्री मंत्र
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि । तन्नो विष्णुः प्रचोदयात् ॥

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ऋग्वेद विष्णु मंत्र
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