उत्सव का परिचय:
परम एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत पवित्र व्रत है, जो अधिक मास के कृष्ण पक्ष में आता है। अधिक मास को मलमास या पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है और यह समय भक्ति एवं आध्यात्मिक साधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
अन्य एकादशियों के विपरीत, परम एकादशी हर वर्ष किसी निश्चित महीने में नहीं आती। यह तभी आती है जब हिंदू पंचांग में अधिक मास जोड़ा जाता है। इस दुर्लभ और पवित्र समय में आने के कारण इसका विशेष महत्व है और यह अपार पुण्य और दिव्य आशीर्वाद प्रदान करती है।
परम एकादशी की कथा:
हिंदू शास्त्रों के अनुसार, परम एकादशी पुरुषोत्तम मास की महिमा से जुड़ी हुई है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। मान्यता है कि इस पवित्र मास में भगवान विष्णु अपने भक्तों को क्षमा, समृद्धि और मोक्ष का आशीर्वाद देते हैं।
प्राचीन काल में, भक्त अधिक मास के दौरान उपवास और पूजा करके अपने पापों और कर्मों से मुक्ति पाने का प्रयास करते थे। परम एकादशी इस मास के सबसे शक्तिशाली दिनों में से एक मानी जाती है। इस दिन व्रत रखने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
यह पर्व क्यों मनाया जाता है:
परम एकादशी का व्रत रखने से:
- भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है
- पापों और नकारात्मक कर्मों से मुक्ति मिलती है
- मानसिक शांति और आध्यात्मिक विकास होता है
- सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है
- मोक्ष की प्राप्ति में सहायता मिलती है
पुरुषोत्तम मास में होने के कारण इसका फल कई गुना बढ़ जाता है।
मुख्य परंपराएं:
🪔 एकादशी व्रत:
भक्त निर्जल या फलाहार व्रत रखते हैं।
भगवान विष्णु की पूजा:
भजन, पूजा और मंत्र जाप किया जाता है:
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय”
व्रत कथा:
परम एकादशी की कथा सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है।
दान:
व्रत के बाद अन्न, वस्त्र और धन का दान किया जाता है।








