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गुजराती नववर्ष (बेसतु वर्ष)

गुजराती नववर्ष (बेसतु वर्ष) २०२६ कब है

गुजराती नववर्ष, जिसे बेसतु वर्ष या नूतन वर्ष भी कहते हैं, मंगलवार, १० नवंबर २०२६ को है। यह कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को, यानी दिवाली के बाद मनाया जाता है और इसी दिन गुजराती विक्रम संवत का नया साल शुरू होता है। लोग सुबह मंदिर जाते हैं, बड़ों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं और सबको साल मुबारक कहते हैं। तारीख आपके शहर में सूर्योदय के समय की तिथि पर निर्भर करती है, इसलिए सुबह का शुभ समय चौघड़िया पर देख लें।

इसी सुबह गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) भी होती है, इसलिए कई गुजराती परिवार नए साल की शुरुआत मंदिर से करते हैं।

कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा और गुजराती विक्रम संवत

हिंदू महीने में दो पक्ष होते हैं और अमावस्या के बाद का उजला पक्ष शुक्ल पक्ष कहलाता है। प्रतिपदा उसकी पहली तिथि है। गुजरात में साल कार्तिक से गिना जाता है, यानी दिवाली की अमावस्या के अगले दिन कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से साल बदलता है। विक्रम संवत परंपरा से उज्जैन के राजा विक्रमादित्य से जुड़ा माना जाता है।

उत्तर भारत में ज्यादातर जगह विक्रम संवत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से बदलता है, जब गुड़ी पड़वा और उगादी भी मनाए जाते हैं। इसलिए कार्तिक से चैत्र के बीच गुजराती पंचांग और उत्तर भारतीय पंचांग के संवत में एक साल का फर्क दिखता है। दोनों सही हैं, बस साल की शुरुआत अलग-अलग जगह मानी जाती है।

बेसतु वर्ष की कथा

यह दिन गोवर्धन से गहराई से जुड़ा है। भागवत पुराण के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्र की भेजी मूसलाधार बारिश से ब्रजवासियों और उनके पशुओं को बचाने के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठाया था। इसीलिए इसी सुबह अन्नकूट और गोवर्धन पूजा होती है और गुजरात के मंदिर भोग से सज जाते हैं।

संवत की शुरुआत परंपरा में उज्जैन के राजा विक्रमादित्य से जोड़ी जाती है, जिन्हें उनके नाम से चले संवत के लिए याद किया जाता है। इसकी शुरुआत को लेकर अलग-अलग मत हैं, इसलिए इसे परंपरा के रूप में ही कहना ठीक है। महाराष्ट्र में यही दिन बलि प्रतिपदा के रूप में उदार राजा बलि की याद में मनाया जाता है।

बेसतु वर्ष की परंपराएं

रीति-रिवाज परिवार, शहर और समुदाय के हिसाब से बदलते हैं। ज्यादातर गुजराती घरों में ये बातें होती हैं।

  • सुबह दर्शन: कई लोग नए कपड़े पहनकर सुबह-सुबह मंदिर जाते हैं और अन्नकूट के दर्शन करते हैं।
  • बड़ों का आशीर्वाद: छोटे लोग माता-पिता और दादा-दादी के पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं।
  • साल मुबारक: लोग रिश्तेदारों, दोस्तों और पड़ोसियों से मिलकर साल मुबारक या नूतन वर्षाभिनंदन कहते हैं, और दूर रहने वालों को संदेश भेजते हैं।
  • सबरस: कई घरों में सुबह-सुबह थोड़ा नमक (सबरस) लाने या आपस में देने का रिवाज है, जिसके बारे में मान्यता है कि इससे साल भर घर में बरकत रहती है। कुछ परिवार इसे मानते हैं और कुछ नहीं।
  • मिठाई और नमकीन: मेहमानों का स्वागत मिठाई, मठिया, चोरा फली और मुखवास से किया जाता है।
  • रंगोली और दीये: आंगन में नई रंगोली बनती है और शाम को दीये जलाए जाते हैं।

व्यापारियों का नया साल

गुजराती व्यापारी परिवारों के लिए बेसतु वर्ष वित्तीय साल की शुरुआत भी है। दिवाली की रात वे शारदा पूजन यानी चोपड़ा पूजन करते हैं, जिसमें नई बही-खाता की पूजा होती है और उन पर शुभ लाभ और श्री लिखा जाता है। नए साल से नई बही का इस्तेमाल शुरू होता है। कई दुकानें कुछ दिन बंद रहने के बाद लाभ पंचमी पर दोबारा खुलती हैं, जिसे काम दोबारा शुरू करने के लिए शुभ माना जाता है। हर परिवार और दुकान का अपना मुहूर्त होता है, इसलिए अपने लिए सही समय देख लें।

घर में नए साल की सुबह

बेसतु वर्ष की सुबह काफी व्यस्त रहती है। घर की सफाई कुछ दिन पहले हो जाती है, भोर में रंगोली बनती है और परिवार सजधजकर मंदिर जाता है। दर्शन के बाद दिन रिश्तेदारों के घर जाने और मेहमानों से मिलने में बीतता है और खाने में अक्सर त्योहार का खास भोजन बनता है। कई घरों में बड़े बच्चों को छोटे उपहार या आशीर्वाद देते हैं। अगर आप गुजरात से दूर हैं तो सुबह माता-पिता और दादा-दादी को फोन करना भी इसी रीति को निभाने का अच्छा तरीका है।

इस दिन को नई शुरुआत की तरह लिया जाता है। लोग पुराने मनमुटाव भुलाते हैं, छोटी-मोटी बातों को माफ करते हैं और साल के लिए सरल संकल्प लेते हैं, साथ ही परिवार के स्वास्थ्य और सुख की प्रार्थना करते हैं।

त्योहारों के क्रम में बेसतु वर्ष

दिवाली के बाद कार्तिक के पहले दिन गोवर्धन पूजा और बेसतु वर्ष आते हैं और फिर भाई-बहन का पर्व भाई दूज आता है। इस साल की तारीखें अलग-अलग पेज पर देख सकते हैं।

अंत में

बेसतु वर्ष एक ही सुबह में भक्ति, परिवार और नई शुरुआत तीनों को जोड़ देता है। आप मंदिर जाएं, बड़ों से मिलें या बस किसी पड़ोसी को साल मुबारक कहें, यह दिन कृतज्ञता और अच्छे भाव से साल शुरू करने का है। सबको साल मुबारक, और दिन शुरू करने का शुभ समय जानने के लिए अपने शहर का चौघड़िया देख लें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजराती नववर्ष (बेसतु वर्ष) २०२६ में कब है?

बेसतु वर्ष पर कौन सा विक्रम संवत शुरू होता है?

साल मुबारक का क्या मतलब है?

सबरस की परंपरा क्या है?

क्या गुजराती नववर्ष और गुड़ी पड़वा एक ही हैं?

गुजराती नववर्ष पर व्यापारी नए बही-खाते क्यों शुरू करते हैं?