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गोवर्धन पूजा (अन्नकूट)

गोवर्धन पूजा (अन्नकूट) २०२६ कब है

गोवर्धन पूजा, जिसे अन्नकूट भी कहते हैं, मंगलवार, १० नवंबर २०२६ को है। यह कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को, यानी दिवाली के बाद मनाई जाती है और पूजा प्रतिपदा के दिन सुबह के समय की जाती है। प्रतिपदा तिथि एक दिन दोपहर में लगकर अगले दिन दोपहर में खत्म हो सकती है, इसलिए पूजा उसी दिन मानी जाती है जिस दिन आपके शहर में सूर्योदय के समय प्रतिपदा हो। अपने शहर का शुभ समय जानने के लिए चौघड़िया देख लें।

इसी सुबह गुजराती नववर्ष भी होता है, यानी अन्नकूट और बेसतु वर्ष (गुजराती नववर्ष) एक ही दिन आते हैं। कई परिवार पहले मंदिर में अन्नकूट के दर्शन करते हैं और फिर रिश्तेदारों को साल मुबारक कहते हैं।

श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की कथा

भागवत पुराण के अनुसार गोकुल और ब्रज के लोग हर साल वर्षा के देवता इंद्र की बड़ी पूजा करते थे। बालक कृष्ण ने उनसे कहा कि गोवर्धन पर्वत की पूजा कीजिए, क्योंकि यही पर्वत गायों को चारा और गांव को जल और आश्रय देता है। गोकुलवासियों ने बात मान ली।

इससे इंद्र नाराज हो गए और उन्होंने गोकुल पर मूसलाधार बारिश करवा दी। तब श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी अंगुली पर उठा लिया और सारे ब्रजवासी अपनी गायों के साथ उसके नीचे आ गए। कई दिन बाद इंद्र का घमंड टूटा और बारिश थम गई। उसी रक्षा के आभार में अन्नकूट का भोग लगाया जाता है और गोवर्धन की पूजा की जाती है।

अन्नकूट क्या है

अन्नकूट शब्द ‘अन्न’ यानी भोजन और ‘कूट’ यानी ढेर से बना है। इस दिन भगवान के सामने ताज़े बने शुद्ध शाकाहारी व्यंजनों का पहाड़ जैसा भोग सजाया जाता है, जैसे मिठाई, पूरी-कचौड़ी, कई तरह की सब्जियां, कढ़ी और चावल, और फिर उसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। छप्पन भोग यानी कृष्ण को 56 तरह के व्यंजन अर्पित करने की परंपरा भी इससे जुड़ी हुई है।

कई मंदिरों में इस दिन भव्य अन्नकूट सजता है, जैसे कृष्ण मंदिर, स्वामीनारायण मंदिर और इस्कॉन केंद्र, और दिनभर दर्शन के लिए खुला रहता है। हर मंदिर और संप्रदाय की परंपरा और पैमाना अलग होता है, इसलिए दर्शन का समय अपने नज़दीकी मंदिर से पूछ लें।

घर पर गोवर्धन पूजा कैसे करें

परिवार और क्षेत्र के हिसाब से रीति थोड़ी बदलती है। घर की सामान्य पूजा आमतौर पर इस तरह होती है।

  1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और घर की सफाई करें। द्वार पर रंगोली बनाएं और दीपक जलाएं।
  2. आंगन में या साफ चौकी पर गाय के गोबर से छोटा गोवर्धन पर्वत या गोवर्धन नाथ की आकृति बनाएं। गोबर न मिले तो कई लोग मिट्टी या तस्वीर रखते हैं।
  3. उसे फूलों से सजाएं और आसपास छोटे दीये रखें। कुछ परिवार गाय और ग्वाल-बालों की छोटी आकृतियां भी बनाते हैं।
  4. रोली, अक्षत, धूप, फूल और दीपक से पूजन करें।
  5. बनाए हुए पकवानों का भोग लगाएं और जिनके यहां परंपरा हो, तुलसी दल भी रखें।
  6. गोवर्धन की परिक्रमा करें, कृष्ण के भजन गाएं और आरती करें।
  7. हो सके तो गायों की पूजा करके उन्हें भोजन खिलाएं। फिर भोग को परिवार और पड़ोसियों में प्रसाद के रूप में बांट दें।

भोग में क्या रखें

  • मिठाई जैसे लड्डू, हलवा, खीर, श्रीखंड और घर की बनी मिठाइयां।
  • पूरी, कचौड़ी, मठरी जैसे नमकीन पकवान।
  • मौसम की कई सब्जियां, अक्सर मिलाकर बनाई गई, साथ में कढ़ी, दाल और चावल।
  • दही, मक्खन और माखन-मिश्री जैसे दूध से बने व्यंजन, जो कृष्ण को प्रिय माने जाते हैं।
  • फल और तुलसी दल। सारा भोजन शुद्ध शाकाहारी होता है और कई परिवार इस दिन प्याज-लहसुन नहीं डालते।

अलग-अलग राज्यों में यह दिन

एक ही दिन देश में अलग रूप में मनाया जाता है। महाराष्ट्र में इसे बलि प्रतिपदा या पाडवा कहते हैं, जब राजा बलि को याद किया जाता है और कई घरों में पति-पत्नी एक-दूसरे को उपहार देते हैं। गुजरात में यह बेसतु वर्ष यानी नववर्ष है। मथुरा, वृंदावन और ब्रज में गोवर्धन पूजा सबसे भव्य रूप में होती है और भक्त गोवर्धन की परिक्रमा करते हैं। नाम और रीति अलग हैं, पर तिथि हर जगह कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा ही है।

दिवाली के दिनों में इसका क्रम

अन्नकूट दिवाली और अमावस्या की रात के लक्ष्मी पूजन के बाद आता है। गुजराती व्यापारी परिवारों में उसी रात शारदा पूजन (चोपड़ा पूजन) भी होता है। दुकानें अक्सर लाभ पंचमी पर दोबारा खुलती हैं और भाई-बहन का पर्व भाई दूज अन्नकूट के बाद आता है। हर साल की तारीख इन पेजों पर देख सकते हैं।

उस दिन के लिए कुछ व्यावहारिक सुझाव

सुबह की तैयारी पहले से कर लें, क्योंकि पूजा प्रतिपदा की सुबह जल्दी करने की मान्यता है। पकवान ताज़े बनाएं और भोग लगाने से पहले उसमें से थोड़ा-थोड़ा अलग रख दें। अगर आप मंदिर में अन्नकूट के दर्शन करने जा रहे हैं तो भीड़ का अंदाज़ा रखें और खुलने का समय पहले पूछ लें। बच्चों को यह पर्व सबसे ज्यादा भाता है, इसलिए उन्हें सरल शब्दों में कृष्ण और गोवर्धन की कथा सुनाएं और छोटे पर्वत को फूलों से सजाने में उनकी मदद लें।

इस कथा से बहुत लोग यही सीख लेते हैं कि जो पहाड़, नदियां, गाय और खेत हमारा पेट भरते हैं, उनकी देखभाल करें और धन या ताकत का घमंड उन्हें भुलाने न दें।

अन्नकूट का महत्व

अन्नकूट का मूल भाव कृतज्ञता और बांटने का है। यह प्रकृति, गाय और धरती का आभार मानने का दिन है, जिसमें पहला भोग भगवान को अर्पित किया जाता है और प्रसाद सबको बांटा जाता है। इसलिए यह सामूहिक सेवा का भी दिन है। मंदिर जाएं या घर पर छोटा गोवर्धन बनाएं, श्रद्धा से भोग लगाएं और दिन का शुभ समय जानने के लिए अपने शहर का चौघड़िया देख लें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोवर्धन पूजा २०२६ में कब है?

गोवर्धन पूजा की दो तारीखें क्यों दिखती हैं?

गोवर्धन पूजा क्यों मनाई जाती है?

अन्नकूट क्या है और इसमें क्या बनाया जाता है?

घर पर गोवर्धन पूजा कैसे करें?

क्या गोवर्धन पूजा और गुजराती नववर्ष एक ही दिन होते हैं?